भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश की राजनीति में वर्ष 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री पद और संगठन में नियुक्तियों को लेकर खींचतान की चर्चा एक बार फिर सामने आई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक विशेष इंटरव्यू में दावा किया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया उस समय खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री पद को लेकर सिंधिया की कथित पसंद का भी खुलासा किया है।
दिग्विजय सिंह का बड़ा खुलासा
दिग्विजय सिंह के मुताबिक, वर्ष 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे। बाद में जब कमलनाथ ने उन्हें मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) का अध्यक्ष बनने का विकल्प दिया, तो सिंधिया ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इसके साथ उन्होंने बताया कि वो अपने खास सिपहसालारों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाना चाहते थे।
तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत के लिए चाहते थे अहम पद
दिग्विजय सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया कि सिंधिया चाहते थे कि उनके समर्थक तुलसी सिलावट को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाए। इसके अलावा, गोविंद सिंह राजपूत को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी देने की भी उनकी इच्छा थी। हालांकि, कमलनाथ इन प्रस्तावों पर सहमत नहीं हुए। दिग्विजय सिंह के अनुसार, पदों को लेकर दोनों नेताओं के बीच सहमति नहीं बन सकी और इसी के बाद उनके संबंधों में तनाव बढ़ता गया।
2018 के बाद कांग्रेस में बढ़ती गई खींचतान
मध्यप्रदेश में वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी। इसके बाद कमलनाथ मुख्यमंत्री बने, जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल माने जा रहे थे। सरकार और संगठन में नेतृत्व को लेकर मतभेदों की चर्चाएं उस दौर में लगातार होती रहीं। मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। उनके साथ कई समर्थक विधायक भी भाजपा में शामिल हुए, जिसके बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई और सत्ता से बाहर हो गई।
बीजेपी की नहीं आई प्रतिक्रिया
दिग्विजय सिंह का यह बयान ऐसे समय में राजनीतिक चर्चा को फिर हवा दे सकता है, जब मध्यप्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के पुराने घटनाक्रम और नेतृत्व से जुड़े फैसलों को लेकर नए सिरे से सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इंटरव्यू में किए गए इन दावों पर संबंधित नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
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