उज्जैन/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह विजयादशमी के दिन 20 अक्टूबर से एक लंबी पैदल यात्रा शुरू करने जा रहे हैं। वे उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर से अयोध्या तक करीब 930 किलोमीटर की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालेंगे। करीब 80 वर्ष की उम्र में इतनी लंबी दूरी पैदल तय करने के उनके फैसले ने राजनीतिक और धार्मिक दोनों क्षेत्रों में चर्चा बढ़ा दी है।
65 से 70 दिन में पूरी होगी यात्रा
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार दिग्विजय सिंह प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे। पूरी यात्रा को लगभग 65 से 70 दिनों में पूरा करने की योजना है। यात्रा का समापन अयोध्या में रामलला के दर्शन के साथ करने का प्रस्ताव है। यात्रा उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर तराना, शाजापुर, सारंगपुर, खुजनेर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर और चंदेरी से आगे बढ़ेगी। इसके बाद यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी।
मध्यप्रदेश से उत्तर प्रदेश तक बनेगा लंबा मार्ग
उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने के बाद यात्रा ओरछा, चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी होते हुए अयोध्या पहुंचेगी। इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय लोगों और सामाजिक समूहों से संवाद भी यात्रा का हिस्सा रहने की बात कही गई है।
धार्मिक यात्रा के साथ जनजागरण का संदेश
दिग्विजय सिंह ने यात्रा को केवल धार्मिक यात्रा के तौर पर नहीं, बल्कि ‘सत्य सनातन स्वाभिमान’ से जुड़े मुद्दों पर जनजागरण अभियान के रूप में पेश किया है। उनके मुताबिक यात्रा के जरिए सनातन धर्म के मूल्यों, धार्मिक परंपराओं और धार्मिक मामलों में पारदर्शिता जैसे विषयों को उठाया जाएगा।
उम्र से ज्यादा संदेश पर नजर
दिग्विजय सिंह की उम्र और यात्रा की लंबी दूरी इस अभियान को खास बनाती है। करीब 930 किलोमीटर की पैदल यात्रा और लगभग दो महीने से अधिक समय तक लगातार चलने का कार्यक्रम अपने आप में बड़ा शारीरिक और संगठनात्मक प्रयास है। इसलिए इस यात्रा को सिर्फ दूरी तय करने के नजरिए से नहीं, बल्कि इसके संदेश और राजनीतिक प्रभाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
कांग्रेस के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है यात्रा
दिग्विजय सिंह लंबे समय से मध्यप्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है। उज्जैन से अयोध्या तक यात्रा का मार्ग मध्यप्रदेश के कई राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होकर गुजर रहा है। ऐसे में यात्रा के दौरान होने वाले स्थानीय संवाद, जनभागीदारी और उठाए जाने वाले मुद्दे कांग्रेस की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि दिग्विजय सिंह ने इसे जनजागरण अभियान के रूप में बताया है, लेकिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से अयोध्या तक की यात्रा और इसके धार्मिक संदर्भों को देखते हुए इसके राजनीतिक मायनों पर भी चर्चा होना तय माना जा रहा है।









