डिंडौरी/खबर डिजिटल/शैलेश नामदेव। मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले की विश्व प्रसिद्ध गोंडी चित्रकला Gond Painting को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन द्वारा शुक्रवार को कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम में गोंडी चित्रकला कलाकारों के लिए विशेष ई-कॉमर्स मंच का शुभारंभ किया गया। इसके माध्यम से पाटनगढ़ की पारंपरिक गोंडी कला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और राज्य मंत्री राधा सिंह ने वर्चुअल माध्यम से किया। इस दौरान पाटनगढ़ और डॉट्स एंड डैशेज संस्था के बीच गोंडी चित्रकला के संरक्षण, कलाकारों की आजीविका संवर्धन और उत्पादों के विपणन को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
कलाकारों की आय में हुआ उल्लेखनीय इजाफा
कार्यक्रम में बताया गया कि डॉट्स एंड डैशेज संस्था के सहयोग से कलाकार परिवारों की आय में बड़ा सुधार देखने को मिला है। पहले जहां परिवारों की वार्षिक आय 35 से 40 हजार रुपये तक सीमित थी, वहीं अब यह बढ़कर 60 हजार से 2.70 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
प्रदर्शनी में दिखे जनजातीय संस्कृति के रंग
समारोह के दौरान गोंडी कलाकारों द्वारा कला प्रदर्शनी भी लगाई गई। कलाकारों ने कैनवास, पेपर शीट, टी-शर्ट, साड़ी, दुपट्टा और अन्य उत्पादों पर गोंडी कला की खूबसूरत प्रस्तुति दी। प्रदर्शनी में लगभग 30 कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया, जिनमें जनजातीय संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन की झलक देखने को मिली।

Amazon Karigar पर होंगे उत्पाद सूचीबद्ध
नई व्यवस्था के तहत पाटनगढ़ के कलाकारों द्वारा तैयार गोंडी चित्रकला आधारित उत्पादों को Amazon Karigar सहित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध किया जाएगा। इससे कलाकारों को सीधे बाजार तक पहुंच मिलेगी और बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी।
157 परिवारों की आजीविका से जुड़ी है गोंडी कला
डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि करंजिया विकासखंड का पाटनगढ़ गांव आज गोंडी कला का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां 157 परिवार प्रत्यक्ष रूप से इस कला से जुड़े हुए हैं। गोंडी चित्रकला केवल कला नहीं, बल्कि गोंड समुदाय के इतिहास, लोककथाओं और जीवन दर्शन की अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि बिंदुओं, महीन रेखाओं और विशेष ज्यामितीय आकृतियों से सजी यह कला मनुष्य और प्रकृति के सह-अस्तित्व का संदेश देती है। ई-कॉमर्स मंच से जुड़ने के बाद अब डिंडौरी के जनजातीय कलाकारों की कला दुनिया भर के खरीदारों तक पहुंच सकेगी।









