डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी, नगर परिषद डिंडोरी क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर में जहां छोटे-छोटे अतिक्रमणों पर परिषद का अमला तत्काल कार्रवाई करता दिखाई देता है, वहीं कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा किए जा रहे बड़े निर्माण कार्यों पर केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता की जा रही है। इससे नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
यहां पर नगर परिषद कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा
ताजा मामला पुरानी डिंडोरी के वार्ड क्रमांक-15 का है, जहां मंडला स्टैंड के पास मुख्य मार्ग पर स्थित अनाज गोदाम के सामने एक व्यक्ति द्वारा बड़े पैमाने पर पक्का निर्माण कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित व्यक्ति के पास पहले लगभग 1000 से 1500 वर्गफीट भूमि का पट्टा था, जिसकी अवधि करीब डेढ़ से दो वर्ष पहले समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद अब लगभग 2500 वर्गफीट क्षेत्र में निर्माण कार्य किया जा रहा है और ऊंची-ऊंची दीवारें खड़ी कर दी गई हैं।
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बड़े अतिक्रमण पर सिर्फ नोटिस, छोटे पर कार्रवाई
स्थानीय नागरिकों के अनुसार परिषद द्वारा संबंधित व्यक्ति को करीब एक साल पहले नोटिस जारी किया गया, लेकिन इसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप निर्माण कार्य कुछ समय धीमा होने के बाद अब फिर तेजी से जारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद छोटे दुकानदारों और गरीब लोगों के अतिक्रमण पर तुरंत कार्रवाई करती है, लेकिन बड़े और प्रभावशाली लोगों के मामलों में सख्ती दिखाई नहीं देती। इससे यह धारणा बन रही है कि नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से नहीं कराया जा रहा है।
बिना अनुमति जारी है निर्माण
जानकारी के अनुसार नगर परिषद ने संबंधित व्यक्ति से भूमि संबंधी वैध दस्तावेज और निर्माण अनुमति से जुड़े अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा था। परिषद के सूत्रों का कहना है कि अब तक न तो भूमि से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं और न ही निर्माण कार्य के लिए नगर परिषद से विधिवत अनुमति ली गई है। इसके बावजूद निर्माण कार्य लगातार जारी है।
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जब इस संबंध में नगर परिषद के राजस्व निरीक्षक से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित व्यक्ति को दो बार नोटिस जारी किया जा चुका है। नोटिस में दी गई समय-सीमा भी समाप्त हो चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य बंद नहीं किया गया है।
शहरवासियों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के पास वैध दस्तावेज नहीं हैं और निर्माण कार्य के लिए आवश्यक अनुमति भी नहीं ली गई है, तो नगर परिषद को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। केवल नोटिस जारी कर जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी जा सकती।
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इन सवालों के घेरे में नगर परिषद
पट्टा समाप्त होने के बाद निर्माण किस आधार पर किया जा रहा है?
नगर परिषद द्वारा मांगे गए दस्तावेज अब तक क्यों प्रस्तुत नहीं किए गए?
दो बार नोटिस जारी होने और समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या नगर परिषद सभी मामलों में समान नियम लागू कर रही है?
यदि निर्माण अवैध है तो उसे रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
प्रशासन से जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध पाया जाता है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि कानून और नियम सभी के लिए समान होने चाहिए तथा किसी भी व्यक्ति को प्रभाव या पहुंच के आधार पर विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए।
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