डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव / डिंडोरी जिले में इस समय रेत माफियाओं का आतंक अपने चरम पर है। कानून को धता बताकर रसूखदार माफिया अब रात के अंधेरे में नहीं, बल्कि दिन के उजाले में भी नदियों का अस्तित्व को बेरहमी से उजाड़ रहे हैं।जानकारी होने के बाबजूद प्रशासन आखिर चुप क्यों हैं। इस चुप्पी से ग्रामीणों में भारी गुस्सा है।
डिंडोरी जिले की रेत खदान देवारी, कमको मोहनिया के क्षेत्र में स्थित पवित्र बुढनेर नदी का सीना चीरकर माफियाओं द्वारा पोकलेन और जेसीबी से रेत निकाल कर हाईवा और टेक्टर में भरी जा रही है। देवारी और कमको मोहनिया गांव के पास नदी के बीचों-बीच प्रतिबंधित पोकलेन मशीनें और जेसीबी उतार दी गई हैं।नियमों के अनुसार नदी क्षेत्रों में पोकलेन या भारी मशीनों से रेत निकालने पर प्रतिबंध होता है। और नदी के प्राकृतिक जलप्रवाह को नुकसान पहुंचाए बिना ही खनन किया जा सकता है।
माफियाओं ने रेत निकालने के लिए नदी की प्राकृतिक जलधारा को ही रोक दिया है। नदी के बीच में मिट्टी, पत्थर डालकर ट्रकों के आने-जाने के लिए लगभग आधा किलोमीटर लंबा रास्ता बना दिया गया है।
मशीनों से नदी की तलहटी को गहरा खोद दिया गया है। इससे मछलियों और पानी के दूसरे जीवों का जीवन खतरे में पड़ गया है। गहरी खुदाई के कारण आसपास के गांवों में जमीन के नीचे का पानी तेजी से नीचे जा रहा है।
हैंडपंप और कुएं का जलस्तर भी काफी नीचे चला गया है। ग्रामीणों को डर है कि अगले गर्मी में पीने के पानी के लिए तरसना पड़ेगा। नदी किनारे की उपजाऊ जमीन धंसकर नदी में समा रही है। इससे सैकड़ों किसानों की रोजी-रोटी पर संकट आ सकता है। रेत से लदे ओवरलोड डंपर और हाइवा दिन-रात गांव की सड़कों में धमाचौकडी़ मचाये हुए हैं। इससे सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। उड़ती धूल से बच्चों और बुजुर्गों को सांस की बीमारी हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह सब किसके दम पर हो रहा है? नदी में चलती पोकलेन और जेसीबी सड़कों पर दौड़ते बेलगाम सैकड़ों टेक्टर और डंपर सम्बंधित अधिकारी को दिखाई क्यों नहीं देते? क्या जानबूझकर इसे अनदेखा किया जा रहा है ।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है,
"जब भी हम शिकायत करते हैं, तो कार्रवाई से पहले ही माफियाओं को खबर मिल जाती है।" अधिकारी सिर्फ छोटे ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़कर अपनी वाहवाही लूटकर फोटो खिंचवाते हैं। बड़ी मशीनों और मुख्य सरगना को कोई छूता भी नहीं।" "इस काले कारोबार को कुछ बड़े नेताओं और रसूखदारों का संरक्षण मिला हुआ है।"
अवैध खनन से परेशान , देवारी, कमको मोहनिया और आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों का सब्र का बाँध अब टूटने लगा है। ग्रामीणों ने साफ कहा है, "यह हमारी जीवनदायिनी नदी है। हम आदिवासियों ने इसे पवित्र नदी का दर्जा दिया है। पोकलेन मशीन और जेसीबी से रेत निकालने के कारण हम जैसे मजदूरों के पेट पर ठेकेदार द्वारा लात मारी जा रही है।"
डिंडोरी की बुढनेर नदी का अस्तित्व दांव पर है। सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और खनिज विभाग के अधिकारी इस मामले में सख्त कदम उठाएंगे? या फिर रेत माफियाओं के आगे कानून यूं ही बेबस बना रहेगा? जिले की जनता को जवाब का इंतजार है।









