खबर डिजिटल / शैलेश नामदेव/ डिंडोरी। भारतीय संस्कृति में प्रेम समर्पण और दाम्पत्य जीवन की अटूट निष्ठा का प्रतीक पर्व करवा चौथ इस वर्ष डिंडोरी जिले में अत्यंत हर्षोल्लास परंपरा और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। स्थानीय जगदम्बा मंदिर प्रांगण समेत पूरे जिले में सुहागिन महिलाओं ने अपने जीवनसाथी की दीर्घायु उत्तम स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की मंगलकामना करते हुए निर्जला व्रत रखा। सुबह से शुरू हुआ व्रतियों का यह पावन अनुष्ठान रात को चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य अर्पण के साथ बेहद आनंददायक वातावरण में संपन्न हुआ।
भक्ति और श्रृंगार का अनूठा संगम
करवा चौथ के पावन अवसर पर महिलाओं के उत्साह और उल्लास का अलग ही रंग देखने को मिला। सूर्योदय से पूर्व सरगी ग्रहण करने के साथ ही व्रत का शुभारंभ हुआ, जिसके बाद महिलाओं ने बिना अन्न और जल के कठोर निर्जला उपवास का पालन किया। इस दौरान बाजारों से लेकर घरों तक में विशेष चहल-पहल और रौनक बनी रही। महिलाओं ने पारंपरिक सोलह श्रृंगार किए, हाथों में खूबसूरत मेहंदी रचाई और नए वस्त्र धारण किए। शाम के समय शहर और ग्रामीण अंचलों में सामूहिक रूप से करवा चौथ कथा का आयोजन किया गया, जहां महिलाओं ने माता करवा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने अखंड सौभाग्य की कामना की।


चंद्र दर्शन के साथ हुआ व्रत का समापन
इस पर्व का सबसे मुख्य और प्रतीक्षित पल रात को चंद्रोदय के साथ आया। आसमान में चांद के दीदार होते ही व्रती महिलाओं के चेहरों पर खुशी की चमक और उत्साह दोगुना हो गया। महिलाओं ने सबसे पहले छलनी से चंद्रमा को निहारा और उसके बाद अपने पति का चेहरा देखा। पतियों ने बड़े प्रेम से अपने हाथों से जल पिलाकर और मिठाई खिलाकर अपनी अर्धांगिनी का यह कठिन व्रत खुलवाया। इस दौरान महिलाओं ने घर के बुजुर्गों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की।
आपसी प्रेम और विश्वास का प्रतीक
यह व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच अटूट विश्वास, समर्पण और स्नेह का एक ऐसा बंधन है जो पारिवारिक रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाता है। आधुनिकीकरण के इस दौर में भी आज की युवा पीढ़ी ने इस प्राचीन संस्कृति और परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ निभाया है, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की एक जीवंत मिसाल पेश करता है।







