डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी, मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना... इस कहावत को डिंडोरी जिले के मेहदवानी क्षेत्र ने पूरी शिद्दत के साथ सच कर दिखाया है। जहां एक तरफ दौर-ए-जदीद में लोग छोटी-छोटी बातों पर बंटने लगते हैं, वहीं मेहदवानी की जमीं से उठी आपसी सौहार्द की यह खुशबू पूरे देश के लिए इत्तेहाद और मोहब्बत का पैगाम दे रही है। यहां मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति ने इस बार भी कौमी एकता की एक ऐसी ऐतिहासिक नजीर पेश की है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
अकीदत की राह से बप्पा की पधारे
मेहदवानी में गणेशोत्सव की शुरुआत किसी आम पंडाल जैसी नहीं होती। यहां भगवान श्री गणेश की मूर्ति की स्थापना से पहले एक बेहद खूबसूरत और रूहानी रवायत निभाई जाती है। समिति के हिंदू भाई सबसे पहले पूरे एहतराम के साथ स्थानीय दरगाह पहुंचते हैं और वहां चादर पोशी करते हैं।
इसके बाद दरगाह परिसर में ही मुस्लिम समाज के लोग उनका इस्तकबाल करते हैं। दरगाह में सजदा करने और दुआ मांगने के बाद, मुस्लिम भाइयों के साथ मिलकर और उनकी मौजूदगी में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा को गाजे-बाजे के साथ लाया जाता है तथा पूरे विधि-विधान से स्थापित किया जाता है।

गंगा-जमुनी तहजीब का सजीव नजारा
गणपति बप्पा की स्थापना के समय पंडाल में जो नजारा देखने को मिलता है, वह भारत की असली आत्मा यानी गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाता है। जब 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारे गूंजते हैं, तो वहां मौजूद मुस्लिम भाई भी पूरी आत्मीयता के साथ इस खुशी का हिस्सा बनते हैं। आरती के बाद दोनों समुदायों के लोग एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई देते हैं और खुशियां बांटते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि त्योहार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन खुशियां और भाईचारा हम सबका साझा है।
पुलिस और प्रशासन ने सिर आंखों पर बिठाया
क्षेत्र में दोनों समुदायों के बीच कायम इस मिसाली भाईचारे की पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने भी दिल खोलकर तारीफ की है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मेहदवानी का यह गणेशोत्सव समाज में आपसी प्रेम, शांति और सद्भावना बनाए रखने का एक बेहतरीन माध्यम बन चुका है। सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने भी इस अनूठी पहल को सलाम करते हुए कहा कि जब समाज खुद आगे बढ़कर मोहब्बत की मिसालें कायम करता है, तो वहां शांति का माहौल अपने आप बन जाता है।
मेहदवानी से सामने आई ये तस्वीरें महज एक धार्मिक आयोजन की नहीं हैं, बल्कि यह संदेश हैं कि अगर दिलों में एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्यार हो, तो हर त्योहार मिलकर एक साझा उत्सव बन जाता है।










