डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ Poshan Vatika Scheme Corruption डिंडौरी - बजाग, मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'पोषण वाटिका' योजना जनपद पंचायत बजाग के अंतर्गत ग्राम पंचायत पडरिया डोंगरी में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। गांव में कुपोषण मिटाने और महिलाओं-बच्चों को हरी सब्जियां उपलब्ध कराने के लिए जिस जमीन पर पोषण वाटिका बननी थी, वहां अब सरपंच के परिवार द्वारा निजी खेती की जा रही है।
यह हैं पूरा मामला
ग्राम पंचायत पडरिया डोंगरी में पोषण वाटिका निर्माण के लिए शासन द्वारा लगभग ढाई लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इस राशि में से 50 हजार रुपये से अधिक खर्च भी दिखा दिए गए हैं।
लेकिन जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर वाटिका का नामोनिशान तक नहीं है। न कोई बाउंड्रीवाल दिखती है, न क्यारी और न ही सब्जियों के पौधे। जिस भूमि पर सरकार की मंशा के अनुरूप वाटिका का निर्माण होना था, वहां वर्तमान में सरपंच के परिवार द्वारा गेहूं और अन्य फसलों की खेती की जा रही है।
इस खुलासे के बाद पूरे गांव में आक्रोश है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर कई बार शिकायत और चर्चा के बावजूद अब तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई।
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ग्रामीणों का कहना
जब राशि खर्च हो चुकी है तो पोषण वाटिका आखिर कहां बनी , क्या निर्माण कार्य हुआ भी या केवल कागजों में पूरा दिखा दिया गया, ढाई लाख के बजट का पैसा गया तो कहां गया, ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सरपंच, सचिव और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है और जरूरतमंद लोग योजना के लाभ से वंचित हैं।
योजना का उद्देश्य
मध्य प्रदेश शासन ने 'पोषण वाटिका' योजना कुपोषण के स्तर को सुधारने के लिए शुरू की थी। इसके तहत गांव में ही महिलाओं और बच्चों को ताजी, हरी सब्जियां और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना था। लेकिन पडरिया डोंगरी में यह योजना जनहित के बजाय निजी लाभ का जरिया बन गई।
सचिन अग्रवाल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बजाग ने बताया कि "मामला संज्ञान में आया है। जानकारी प्राप्त हुई है कि पोषण वाटिका के निर्माण को लेकर शिकायतें हैं। इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ उचित दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।"
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण शासकीय योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों पर कब कार्रवाई होती है।









