डिंडोरी / खबर डिजिटल / शैलेश नामदेव/ डिंडोरी जिले के बजाग में सागरटोला से भानपुर के बीच 22 किलोमीटर लंबी सड़क का चौड़ीकरण कार्य चल रहा है। इस निर्माण कार्य के दौरान 100 से अधिक बबूल, दर्जनों फलदार वृक्ष और 50 वर्ष से अधिक पुराने आधा दर्जन पीपल व बरगद के पेड़ प्रभावित हो रहे हैं। अब बजाग मुख्यालय के पास स्थित पुराने वटवृक्षों को काटने की तैयारी की जा रही है, जिस पर स्थानीय निवासियों, पर्यावरण प्रेमियों और जनप्रतिनिधियों ने ऐतराज जताया है।
तकनीकी फेरबदल से पेड़ बचाने की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क निर्माण की योजना बनाते समय कुछ बदलाव करके इन पेड़ों को बचाया जा सकता था। मुख्य मार्ग के संरेखण (अलाइनमेंट) में मामूली बदलाव किया जा सकता था। नाली और फुटपाथ की चौड़ाई व दिशा को पुनर्नियोजित किया जाना चाहिए था। संवेदनशील मोड़ों को समायोजित कर पेड़ों को सुरक्षित किया जा सकता था। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने संरक्षण के विकल्पों पर ध्यान न देकर सीधे पेड़ों की कटाई का रास्ता चुना।
संयुक्त निरीक्षण की मांग को लेकर प्रशासन को घेरा
क्षेत्र में बढ़ते असंतोष के बीच स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व, लोक निर्माण विभाग (PWD) और वन विभाग की संयुक्त टीम मौके पर जाकर स्वीकृत नक्शे और जमीनी स्थिति की जांच करे। सड़क के दायरे में आने वाले सभी पेड़ों की उम्र और मोटाई का आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज किया जाए। संबंधित इंजीनियर लिखित में स्पष्ट करें कि अमुक पेड़ को बचाना तकनीकी रूप से क्यों संभव नहीं है। सड़क के अलाइनमेंट से जुड़े निजी और सार्वजनिक हितों का निष्पक्ष अध्ययन कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
नियमों के पालन और अनुमति पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत तय प्रक्रियाओं के पालन पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का पूछना है कि क्या पेड़ों की कटाई से पहले तहसीलदार या अनुविभागीय अधिकारी (SDO/SDM) स्तर से मौके का मुआयना कर वैध अनुमति ली गई थी? फिलहाल इस मामले पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे सड़क निर्माण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जरूरी तकनीकी सुधार कर पुराने वृक्षों को बचाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।









