डिंडौरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव /Dindori Water Crisis: डिंडोरी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर नजर आ रही है। रामगुड़ा ग्राम पंचायत के एक विवादित फैसले ने लगभग 900 ग्रामीणों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। भीषण गर्मी के इस दौर में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'जल जीवन मिशन' योजना के तहत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए पाइपलाइन बिछाई गई और घरों में नल के कनेक्शन भी दिए गए, लेकिन हकीकत यह है कि इन नलों से पानी नहीं टपकता। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद बाद भी उन्हें पानी के लिए पुराने कुओं और दूर-दराज के जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
रामगुड़ा के ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत द्वारा महीने में केवल एक या दो दिन ही पानी की सप्लाई की जाती है। विडंबना यह है कि इस अनियमित सप्लाई के बावजूद पंचायत द्वारा ग्रामीणों से पूरे महीने का जल शुल्क वसूला जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, जिस कुएं से पानी की सप्लाई की जा रही है, उसकी लंबे समय से सफाई नहीं हुई है। कुएं में गंदगी का अंबार लगा है और बिना किसी फिल्टर प्रक्रिया के यही दूषित पानी घरों तक पहुँचाया जा रहा है। इस गंदे पानी के सेवन से गांव में बीमारियों के फैलने का डर बना हुआ है।
एक तरफ जहाँ ग्रामीण पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पंचायत ने कुएं की दीवार पर एक नोटिस चस्पा कर दिया है। इस तुगलकी फरमान के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति कुएं के पास नहाते या कपड़े धोते पाया गया, तो उस पर ₹500 का जुर्माना लगाया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि जब पीने के पानी का इंतजाम नहीं है, तो ऐसे प्रतिबंध उनकी परेशानियों को और बढ़ा रहे हैं।
गंभीर मुद्दे पर जब पीएचई विभाग (PHE) के कार्यपालन यंत्री अफजल अमानुल्ला से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कुएं की तत्काल सफाई कराने और जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के लिए संबंधित अमले को निर्देशित करने का आश्वासन दिया है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन की यह नींद कब तक टूटती है और रामगुड़ा के प्यासे ग्रामीणों को कब तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो पाता है।









