CM Mohan: मध्य प्रदेश के प्रमुख मंदिरों की दान व्यवस्था को डिजिटल बनाने के लिए मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान राशि में हेरफेर के आरोपों के बाद सबक लेते हुए, मप्र सरकार अब प्रदेश के सभी वीआईपी और प्रसिद्ध मंदिरों की कमान अपने हाथ में लेकर एक नया मॉडल लागू करने जा रही है। सरकार की इस नई नीति के तहत, देश के सुरक्षित मंदिर प्रबंधन प्रणालियों का अध्ययन किया जाएगा, जिसके बाद इसे उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर और खंडवा के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित कई बड़े मंदिनों में लागू किया जाएगा।
कमेटी का गठन
प्रदेश के धार्मिक न्यास, धर्मस्व, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने ओंकारेश्वर दौरे दौरान इस योजना का आधिकारिक खुलासा किया। उन्होंने बताया कि भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले गुप्त दान और चढ़ावे के पारदर्शी के लिए सरकार एक समिति गठित कर रही है। मंत्री लोधी ने दोटूक शब्दों में कहा कि भक्तों का विश्वास और उनकी आस्था सरकार की पहली प्राथमिकता है। यह कमेटी देश के सबसे बेहतर प्रबंधित मंदिरों का अध्ययन कर मप्र के लिए एक प्लान तैयार करेगी।
महाकाल में डिजिटल कवच
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में वर्तमान में ऑनलाइन पेमेंट और क्यूआर कोड के जरिए दान की व्यवस्था है। इसके अलावा, भेंट पेटियों से निकलने वाली नकद राशि को एक कांच के कक्ष में सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे लाइव निगरानी के बीच गिना जाता है। इसके तुरंत बाद बैंक कर्मचारी इस राशि को सीधे मंदिर के खाते में जमा कर देते हैं।
ओंकारेश्वर में वीडियोग्राफी
ओंकारेश्वर मंदिर में वर्तमान नियमों के तहत जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति की मौजूदगी में दान पेटियां खोली जाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया की बकायदा वीडियोग्राफी कराई जाती है, ताकि किसी भी गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। सरकार के इस नए कदम से आने वाले दिनों में मप्र के धार्मिक पर्यटन को एक नई दिशा मिलेगी।









