Himmat Kothari: मध्य प्रदेश की सियासत में बुधवार को उस समय भूचाल आ गया, जब भाजपा के सबसे कद्दावर और वरिष्ठ नेताओं में शुमार, प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी अचानक रतलाम SP कार्यालय पहुंच गए। कोठारी अधिकारियों की कार्यप्रणाली से इस कदर खफा थे कि वे किसी कुर्सी पर बैठने के बजाय सीधे एसपी चैंबर के बाहर गैलरी में जमीन पर ही धरने पर बैठ गए। अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि जब सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों की यह हालत है, तो आम जनता का क्या होता होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
क्या है पूरा विवाद?
इस सियासी और प्रशासनिक ड्रामे के पीछे की वजह एक जमीन पर हुआ कथित अवैध कब्जा है। पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी के बचपन के मित्र और आपातकाल के दौरान जेल गए मीसाबंदी बसंत पुरोहित की भूमि पर कुछ भूमाफियाओं ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। कोठारी ने मीडिया को बताया कि वे इस मामले को लेकर कुछ दिन पहले वे खुद एसपी अमित कुमार से मिले थे और उन्हें पूरे घटनाक्रम की लिखित व मौखिक जानकारी दी थी। इसके बावजूद पुलिस के मैदानी अमले ने रसूखदारों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी से नाराज होकर उन्हें यह कठोर कदम उठाना पड़ा।
एसपी दफ्तर में हड़कंप, थाना प्रभारी को नोटिस
एक पूर्व गृह मंत्री को अपने चैंबर के बाहर जमीन पर बैठा देख एसपी कार्यालय के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही एसपी अमित कुमार तत्काल अपने कक्ष से बाहर आए। उन्होंने मान-मनौव्वल करते हुए हिम्मत कोठारी को ससम्मान अपने चैंबर के अंदर बैठाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने तुरंत डीडी नगर थाना प्रभारी को तलब किया और पूरे प्रकरण की केस डायरी खंगाली। कप्तान ने लापरवाही बरतने पर संबंधित थाना प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ ही भूमाफियाओं के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
पूर्व गृह मंत्री का छलका दर्द
धरने के बाद मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए हिम्मत कोठारी के तेवर बेहद तल्ख नजर आए। उन्होंने व्यवस्था पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में इस समय नौकरशाही और अधिकारियों की मनमानी सातवें आसमान पर है, प्रदेश में पूरी तरह अराजकता का माहौल बन चुका है। यदि सूबे के एक पूर्व गृह मंत्री और जनप्रतिनिधि को न्याय के लिए थाने और एसपी ऑफिस के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, तो आम नागरिक को न्याय कैसे मिलेगा? मैं प्रशासन को चेतावनी दे रहा हूं कि यदि मेरे मित्र को उनकी जमीन वापस नहीं मिली और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो मैं आमरण अनशन पर बैठने से भी पीछे नहीं हटूंगा और जरूरत पड़ी तो अपनी ही पार्टी BJP को हमेशा के लिए अलविदा कह दूंगा।
वही दूसरी ओर, पूरे मामले पर सफाई देते हुए रतलाम एसपी अमित कुमार ने कहा कि इस जमीन विवाद में संबंधित दूसरे पक्ष को भी साक्ष्य और दस्तावेजों के साथ बुलाया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। पूर्व मंत्री की शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मातहत अधिकारियों को आवश्यक और वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं।









