भोपाल। मध्य प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा राज्य में दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन देने और उन्नत देशी गोवंश के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता का समापन शनिवार को हो रहा है। यह प्रतियोगिता 27 अक्टूबर से प्रदेश के चयनित 208 वृंदावन ग्रामों में संचालित की जा रही है।
विजेताओं को मिलेगी 3.64 करोड़ की प्रोत्साहन राशि
प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य सर्वाधिक दूध देने वाली गायों के पशुपालकों को चिन्हित कर पुरस्कृत करना है। योजना के अंतर्गत कुल 624 पुरस्कार तय किए गए हैं, जिनके तहत कुल 3.64 करोड़ की राशि का वितरण किया जाएगा। इसमें प्रथम स्थान पाने वाले पशुपालक को 1 लाख, द्वितीय स्थान के लिए 50 हजार और तृतीय स्थान के लिए 25 हजार की सम्मान राशि दी जाएगी। खास बात यह है कि इस राशि का शत-प्रतिशत उपयोग देशी गायों की खरीद, संवर्धन और संरक्षण में ही करना अनिवार्य होगा।


देशी नस्लों पर विशेष फोकस
यह पहल मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के तहत स्वीकृत की गई है। इसमें गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी और निवाड़ी जैसी अधिसूचित स्वदेशी नस्लों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। आने वाले वर्षों (2027-28 से 2030-31) में इस प्रतियोगिता का दायरा बढ़ाकर राज्य के सभी 313 विकासखंडों तक किया जाएगा। नियम के अनुसार, एक परिवार से केवल एक प्रतिभागी या गाय ही इसमें भाग ले सकती है।
जिला और विकासखंड समितियां
प्रतियोगिता के निष्पक्ष संचालन के लिए त्रिस्तरीय प्रशासनिक व्यवस्था बनाई गई है। विकासखंड स्तरीय समिति में अनुभाग अधिकारी (राजस्व) और पशु चिकित्सा अधिकारी (सदस्य सचिव) आवेदनों की जांच कर प्रतियोगिता कराएंगे। इसके बाद जिला स्तरीय समिति जिसमें कलेक्टर, सीईओ जिला पंचायत और पशुपालन विभाग के उपसंचालक शामिल हैं परिणामों का अंतिम सत्यापन कर विजेताओं के नामों की घोषणा करेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का लक्ष्य
सरकार का उद्देश्य पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाकर किसानों की आय में वृद्धि करना है। इस योजना से पशुपालकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और वृंदावन ग्राम दुग्ध उत्पादन के आदर्श केंद्र के रूप में विकसित होंगे।







