राज्य सरकार सरकारी नौकरी से जुड़े नियमों में लंबे समय बाद बड़ा बदलाव करने जा रही है. करीब 65 वर्ष पहले लागू की गई सामान्य सेवा शर्तों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. नए प्रस्तावित नियमों में नियुक्ति की पात्रता, परिवीक्षा अवधि, स्वास्थ्य परीक्षण, वरिष्ठता और पदोन्नति जैसे महत्वपूर्ण विषयों को अधिक स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. अब तक लागू नियमों में केवल महिला संबंधी अपराध में दोषी पाए गए व्यक्ति को सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जाता था. नए मसौदे में इस दायरे को विस्तारित करते हुए नैतिक पतन से जुड़े गंभीर अपराधों को भी शामिल किया गया है. इसके तहत हत्या, भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर मामलों में दोषसिद्ध व्यक्ति सरकारी नौकरी पाने के पात्र नहीं होंगे.
नियमों में स्पष्टता लाने के लिए तैयार हुआ नया प्रारूप
सरकारी सेवा की सामान्य शर्तें वर्ष 1961 में निर्धारित की गई थीं. समय-समय पर इनमें संशोधन तो किए गए, लेकिन कई प्रावधानों को लेकर विभागों में भ्रम की स्थिति बनी रहती थी. ऐसे मामलों में संबंधित विभागों को सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन लेना पड़ता था, जिससे निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होती थी. इसी समस्या को दूर करने के उद्देश्य से सरकार ने नियमों का नया प्रारूप तैयार किया है. विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया द्वारा तैयार किए गए इस मसौदे पर 15 जून तक सुझाव आमंत्रित किए गए हैं. सुझाव प्राप्त होने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा.
प्रोबेशन और स्थायी नियुक्ति को लेकर नया प्रावधान
नए नियमों में परिवीक्षा अवधि को लेकर भी महत्वपूर्ण स्पष्टता दी गई है. प्रस्ताव के अनुसार निर्धारित प्रोबेशन अवधि समाप्त होने के बाद अधिकतम छह माह के भीतर संबंधित कर्मचारी को स्थायी करने या नहीं करने का निर्णय लेना अनिवार्य होगा. यदि तय समय सीमा में कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो यह माना जाएगा कि कर्मचारी के कार्य को लेकर कोई आपत्ति नहीं है और उसे स्वतः स्थायी नियुक्ति का लाभ मिल जाएगा.
दो बच्चों के नियम और स्वास्थ्य परीक्षण यथावत
मसौदे में एक से अधिक जीवित जीवनसाथी रखने वाले व्यक्तियों को सरकारी सेवा के लिए अपात्र माना गया है. हालांकि विशेष परिस्थितियों में सरकार को छूट देने का अधिकार रहेगा. स्वास्थ्य परीक्षण को भी अनिवार्य रखा गया है. यदि कोई उम्मीदवार मेडिकल जांच में अयोग्य घोषित होता है, तो उसे किसी विशेष विवेकाधिकार के आधार पर राहत नहीं दी जा सकेगी. वहीं दो से अधिक बच्चों वाले कर्मचारियों के संबंध में लागू नियमों को यथावत बनाए रखने का प्रस्ताव है. नए प्रारूप में वरिष्ठता निर्धारण को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है. चयन सूची में प्राप्त क्रम के आधार पर वरिष्ठता तय होगी, न कि जॉइनिंग की तारीख के आधार पर. साथ ही पदोन्नति के मामलों में वरिष्ठता और उपयुक्तता दोनों को महत्व दिया जाएगा, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बन सकें.









