Kisan Kalyan Yojana: मध्य प्रदेश के लाखों किसान इस समय एक बड़े असमंजस में हैं। सवाल है कि क्या प्रदेश की मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना को चुपचाप बंद कर दिया गया है? साल 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही मोहन यादव सरकार के इस कार्यकाल में किसानों के खातों में योजना की राशि न आने से कयासों का बाजार गर्म है। आखिरकार मामला क्या है? क्यों किसान खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं?
क्या है योजना और कैसे मिलता था लाभ?
दरअसल, साल 2019 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी एक पहल की गई थी। 22 सितंबर 2020 को तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार ने मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत राज्य के किसानों को केंद्रीय सहायता के अलावा सालाना 6,000 की आर्थिक मदद दी जाती थी। इस तरह एमपी के पात्र किसानों को कुल मिलाकर 12,000 सालाना की आर्थिक मदद मिल रही थी।
सत्ता परिवर्तन, किस्तों पर ब्रेक
साल 2023 के अंत में जब मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली, तब शुरुआती दौर में थोड़ी देरी के साथ तीन किस्तें जारी की गईं। लेकिन उसके बाद से राज्य सरकार की ओर से इस योजना का पैसा किसानों के खातों में ट्रांसफर नहीं हुआ है।
उठता बड़ा सवाल
सरकार ने इस योजना को पूरी तरह बंद कर दिया है या फिर आर्थिक तंगी के चलते इसे कुछ समय के लिए होल्ड पर रखा गया है? इस मामले पर सरकार की ओर से फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। हैरानी की बात यह है कि इस योजना के अटकने की भनक जमीन पर किसानों को समय रहते लग ही नहीं पाई।
किसान कल्याण वर्ष और भावांतर
एक ओर मोहन सरकार चालू वर्ष 2026 को बड़े स्तर पर 'किसान कल्याण वर्ष' के तौर पर सेलिब्रेट कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सरकार का तर्क है कि वह भावांतर भुगतान योजना और अन्य माध्यमों से किसानों को सीधे लाभ पहुंचा रही है। लेकिन बड़ा सवाल अपनी जगह कायम है कि उस योजना का क्या हुआ जिसे किसानों की रीढ़ मजबूत करने के लिए शुरू किया गया था? किसानों का आरोप है कि इस बड़ी कल्याणकारी योजना को ठंडे बस्ते में डालकर सरकार उन्हें उलझा रही है।
DAP खाद समस्या
इतना ही नहीं मध्यप्रदेश के किसानों को यूरिया डीएपी खाद की कमी भी समय पर नहीं मिल पा रही है। खाद नहीं मिलने से प्रदेशभर में बीते मीहनों पहले प्रदर्शन देखे गए। खाद को लेकर किसान सड़कों पर उतर आए। और तो और प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री भाजपा विधायक भूपेन्द्र सिंह ने अपने क्षेत्र में खाद की कमी की समस्या को लेकर सीएम मोहन को पत्र भी लिखा, लेकिन किसानों की खाद की समस्या हल नही हो सकी। सबसे बड़ी बात तो यह है कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मोदी सरकार में कृषि मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे है। शिवराज सिंह और मोहन यादव खुद को किसान पुत्र बताते आए है, इसके बाद भी किसानों की सुध अबतक नहीं ली।









