डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में इन दिनों खनिज माफियाओं के अवैध खनन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। इन रसूखदारों किसी का डर नहीं है। इसके सामाने कानून व्यवस्था ने घुटने टेक दिये हैं।
डिंडौरी जिले के मोहनिया में नदियों का सीना चीरकर अवैध रेत उत्खनन किया जा रहा है, डिंडोरी जिले की पवित्र नदी बुढनेर का सीना चीरकर रेत खदान देवारी, कमको मोहनिया में जिस बेरहमी से अवैध रेत उत्खनन किया जा रहा है, उसने न सिर्फ पर्यावरणविदों बल्कि आम जनता को भी झकझोर कर रख दिया है। डंके की चोट पर चल रहे इस अवैध कारोबार को देखकर अब एक ही बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह खेल?
खनिज माफियाओं के हौसले बुलंद

दिन के उजाले में धड़ल्ले से चल रहा अवैध खनन का खेल
अवैध खनन का यह खेल रात के अंधेरे तक सीमित नहीं रह गया है। खनिज माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि दिन के उजाले में प्रतिबंधित पोकलेन और भारी-भरकम मशीनें सीधे नदी के बीचों-बीच उतार दी गई हैं।रेत को जल्द और आसानी से निकालने और भारी वाहनों तक पहुँचाने के लिए माफियाओं ने जलधारा को रोककर नदी के बीचों-बीच लंबा रैंप तैयार कर लिया हैं। इससे नदी का स्वाभाविक प्रवाह पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। मशीनों द्वारा नदी के तल को इतनी गहराई तक खोदा जा रहा है कि जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, जिससे आने वाले दिनों में भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
डिंडौरी प्रशासन की चुप्पी क्या कहती है..
ओवरलोड डंपर और हाइवा चौबीसों घंटे ग्रामीण और मुख्य मार्गों से गुजर रहे हैं, जिससे सड़कें में जगह- जगह बड़े गड्ढे हो चुके हैं।नदियों के बीच चल रही पोकलेन मशीनें और सडकों में धूल उड़ाते डंपर किसी से छिपे नहीं हैं। इस खुले खेल पर खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की 'रहस्यमयी चुप्पी' कई गंभीर सवाल खड़े करती है, क्या वाकई प्रशासन इस बात से अनजान है कि उसकी नाक के नीचे खनिज संपदा की चोरी हो रही है? या फिर 'सफेदपोशों' और 'रसूखदारों' का आशीर्वाद इस काले कारोबार को सुरक्षा कवच दे रहा है?

ग्रामीणों का आरोप - बड़ी मशीनों पर कार्रवाई से बचते हैं अधिकारी
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद सिर्फ दिखावे के लिए कभी-कभार छोटी-मोटी कार्रवाई की जाती है, लेकिन मुख्य सरगना और बड़ी मशीनों पर हाथ डालने से अधिकारी हमेशा बचते नजर आते हैं। कार्रवाई की भनक माफियाओं को पहले ही लग जाती है, जिससे वे सतर्क हो जाते हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश
इस अवैध उत्खनन से सबसे ज्यादा प्रभावित स्थानीय ग्रामीण और किसान हो रहे हैं। रेत के इस अंधाधुंध दोहन के कारण नदियों के किनारे धंसने लगे हैं । ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस अवैध खेल को तुरंत नहीं रोका गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि इस गंभीर मामले पर जिले के उच्च अधिकारी और शासन क्या कड़ा कदम उठाते हैं, या फिर डिंडोरी जिले की नदियां इसी तरह माफियाओं के लालच की भेंट चढ़ती रहेंगी।









