भोपाल/ओरछा/खबर डिजिटल/ अपने बेबाक और चर्चित बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाली मध्यप्रदेश की पूर्व मंत्री इमरती देवी ने मुख्यमंत्री पद को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। ओरछा में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान इमरती देवी ने मंत्री कृष्णा गौर को लेकर रामराजा सरकार से एक खास प्रार्थना करने की बात कही। जिसमें उन्हें मुख्यमंत्री बनने की कामना की।
इमरती देवी और कृष्णा गौर की मुलाकात
दरअसल, ओरछा पहुंचीं इमरती देवी की मुलाकात मंत्री कृष्णा गौर से हुई। इस दौरान उन्होंने कृष्णा गौर को गले लगाया और उनसे कहा कि वह काफी दिनों बाद मिली हैं। इसके बाद इमरती देवी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह तो रामराजा से प्रार्थना करेंगी कि कृष्णा गौर को मुख्यमंत्री बना दें।
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सियासी गलियारों में चर्चा तेज
इमरती देवी का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। बातचीत के दौरान उन्होंने कृष्णा गौर से कहा, 'मंत्री जी, बड़े दिनों में मिली हो। मैं तो कहती हूं कि रामराजा मुख्यमंत्री बना दे।' इमरती देवी की यह बात सुनकर कृष्णा गौर कुछ क्षण के लिए रुकीं और उनके करीब जाकर कुछ कहा। इसके बाद वह मुस्कुराते हुए वहां से आगे बढ़ गईं।
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बीच बयान से बढ़ी सियासी हलचल
इमरती देवी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक ओरछा में आयोजित हो रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री पद को लेकर दिया गया उनका बयान स्वाभाविक तौर पर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इमरती देवी ने यह बात किस संदर्भ में कही, इसे लेकर कोई आधिकारिक राजनीतिक संकेत सामने नहीं आया है। लेकिन उनके बयान ने मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर चलने वाली चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।
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सिंधिया समर्थक नेताओं में गिनी जाती हैं इमरती देवी
इमरती देवी की पहचान मध्यप्रदेश की राजनीति में एक मुखर और बेबाक नेता के तौर पर रही है। वह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की करीबी और कट्टर समर्थक मानी जाती हैं। अपने तीखे तेवर और सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयानों के चलते वह अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। ऐसे में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बीच कृष्णा गौर को मुख्यमंत्री बनाने की उनकी टिप्पणी को लेकर सियासी प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। विपक्ष को भी इस बयान के जरिए सरकार और भाजपा के नेतृत्व पर सवाल उठाने का मौका मिल सकता है।







