इंदौर/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में आगामी नगर निगम पार्षद चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। अगले 10 से 12 महीनों के दौरान भाजपा के भीतर नए समीकरण बनने और कई नेताओं के राजनीतिक प्रभाव में बदलाव देखने को मिल सकता है। चुनावी टिकटों के वितरण को लेकर संगठन और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार पार्षद चुनाव केवल स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह भविष्य के विधानसभा और लोकसभा चुनावों की राजनीतिक जमीन भी तैयार करेगा। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ युवा नेतृत्व की भूमिका भी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के सामने संगठनात्मक चुनौती
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव के पद संभालने के बाद से हर वार्ड में समीकरण बदले हैं, क्योंकि अब उनके समर्थक भी हर वार्ड में सक्रिय है। माना जा रहा है कि टिकट वितरण के समय उनके प्रभाव की वास्तविक परीक्षा होगी। यदि उनके समर्थकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलता है तो संगठन में उनका राजनीतिक कद और मजबूत हो सकता है। वहीं अपेक्षानुसार टिकट नहीं मिलने की स्थिति में उनके नेतृत्व को लेकर सवाल भी उठ सकते हैं।
सांसद शंकर लालवानी से समर्थकों की बढ़ी उम्मीदें
दो बार के सांसद शंकर लालवानी का संगठन में प्रभाव लगातार बढ़ा है। पिछले नगर निगम चुनाव में उनके कई समर्थकों को टिकट मिला था। अब उनका प्रभाव दिल्ली दरबार में बढ़ने के बाद समर्थकों की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस बार भी टिकट वितरण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रह सकती है। जिसको लेकर उनके समर्थक अभी से सक्रिय हो चुके हैं।
संगठन के पदाधिकारियों की भूमिका भी रहेगी अहम
भाजपा के प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे और प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत खरे को भी संगठन के प्रभावशाली नेताओं में माना जा रहा है। दोनों शीर्ष नेतृत्व के करीबी माने जाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्षद चुनाव में इनके समर्थकों को भी टिकट दिलाने की कोशिशें देखने को मिल सकती हैं, विशेषकर पांच नंबर विधानसभा क्षेत्र में, क्योंकि यहां पर उनके समर्थकों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।
तुलसी सिलावट की रणनीति पर रहेंगी निगाहें
प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री तुलसी सिलावट की राजनीतिक सक्रियता पर भी सभी की नजर रहेगी। माना जा रहा है कि वे भी अपने समर्थकों को विभिन्न वार्डों से टिकट दिलाने का प्रयास कर सकते हैं। टिकट वितरण के दौरान उनकी भूमिका कई विधानसभा क्षेत्रों में प्रभाव डाल सकती है। संगठन के चुनाव में भी समन्वय के आधार पर उनके समर्थकों ने महत्वपूर्ण पद पाया था।
नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के लिए भी परीक्षा
भाजपा महानगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के समर्थक भी पार्षद टिकट की उम्मीद लगाए हुए हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के विधायक उनके समर्थकों को कितना प्रतिनिधित्व देते हैं, और संगठन व जनप्रतिनिधियों के बीच किस प्रकार का तालमेल बनता है।
RSS की शाखा का वीडियो सोशल मीडिया पर किया पोस्ट… छात्र पर थाने में केस दर्ज
विधानसभावार संभावित तस्वीर
विधानसभा-1:
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार यहां मौजूदा पार्षदों में सीमित संख्या में ही टिकट दोहराए जा सकते हैं। शिवम यादव समेत दो पार्षदों का नाम दोबारा टिकट पाने वालों में प्रमुखता से लिया जा रहा है।
विधानसभा-2:
इस क्षेत्र में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। विधायक रमेश मेंदोला इस बार कई नए और युवा चेहरों को अवसर दे सकते हैं। राजनीतिक चर्चाओं में पूजा पाटीदार, राजेंद्र राठौड़ और मनोज मिश्रा के टिकट दोहराए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। साथ ही अंतिम निर्णय विधायक मेंदोला के हरी झंडी देने के बाद ही होगा। जिसमें चंदू शिंदे का नाम भी प्रमुख है।
विधानसभा-3:
यह सीट सबसे अधिक चर्चाओं में बनी हुई है। विधायक गोलू शुक्ला के नेतृत्व में इस क्षेत्र में नए चेहरों को प्राथमिकता मिलने की अटकलें हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यहां बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि पिछली बार पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने अपने समर्थकों को तवज्जो दी थी।
विधानसभा-4:
विधायक मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ भी इस बार युवाओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को अवसर देने की रणनीति अपना सकती हैं। इस क्षेत्र में भी नए चेहरों को लेकर चर्चाएं तेज हैं, हालांकि इस विधानसभा में सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी अपने समर्थकों के लिए पूरी जोर आजमाइश करेंगे।
विधानसभा-5:
इस विधानसभा में टिकट वितरण को लेकर विधायक के अलावा अन्य जनप्रतिनिधि और संगठन से जुड़े नेताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने की संभावना है। समर्थकों को टिकट दिलाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास देखने को मिल सकते हैं। विधायक महेंद्र हार्डिया के साथ प्रदेश पदाधिकारी गौरव रणदीवे, निशांत खरे और स्वप्निल कोठारी भी अपने समर्थकों के लिए टिकट की जोर आजमाइश करेंगे।
राऊ विधानसभा:
राऊ क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। विधायक मधु वर्मा पहली बार इस चुनाव में अपनी टीम के साथ उतरेंगी और अपने समर्थकों को प्राथमिकता दे सकती हैं। वहीं राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार बबलू शर्मा और प्रशांत बड़वे इस बार पार्षद चुनाव नहीं लड़ सकते, क्योंकि भविष्य में उन्हें बड़े चुनाव की भूमिका के रुप में देखा जा रहा है, हालांकि यहां पर जीतू जिराती भी अपने समर्थकों को टिकट दिलाने का प्रयास जरुर करेंगे।
मुख्यमंत्री की विशेष नजर रहेगी इंदौर पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार इंदौर नगर निगम चुनाव पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विशेष फोकस रहेगा। मुख्यमंत्री स्वयं इंदौर के प्रभारी मंत्री भी हैं, इसलिए संगठन और सरकार दोनों की नजर इस चुनाव पर रहेगी। ऐसे में टिकट वितरण से लेकर चुनावी रणनीति तक प्रत्येक निर्णय का राजनीतिक महत्व बढ़ जाएगा। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि भाजपा के भीतर कौन-से नेता अपने समर्थकों को संगठन और चुनावी राजनीति में मजबूत स्थान दिलाने में सफल होते हैं और किसके राजनीतिक प्रभाव में बदलाव आता है।









