इंदौर/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के तहत निर्माणाधीन इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना में सुरंग निर्माण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना के विभिन्न चरण निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप पूरे किए जा रहे हैं। 3 अगस्त 2026 तक की प्रगति के अनुसार सुरंग निर्माण में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं।
सुरंग निर्माण ने पकड़ी रफ्तार
पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, सुरंग की खुदाई के बाद की जाने वाली लाइनिंग प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। यह चरण सुरंग को मजबूती, स्थायित्व और दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। परियोजना की 2,957 मीटर लंबी सुरंग में लाइनिंग का कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके बाद अब सुरंग के भीतर बैलास्टलेस ट्रैक बिछाने का काम तेज गति से किया जा रहा है। अब तक 1,216 मीटर बैलास्टलेस ट्रैक का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं पीसीसी (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) की अंतिम परत का 1,470 मीटर और पहली परत का 2,007 मीटर कार्य भी पूर्ण किया जा चुका है। वर्तमान में 810 मीटर बैलास्टलेस ट्रैक और 740 मीटर पीसीसी निर्माण कार्य जारी है।
आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं पर विशेष ध्यान
सुरंग के भीतर जल निकासी व्यवस्था विकसित करने के लिए दोनों ओर साइड ड्रेन, इनवर्ट ड्रेन और अन्य संरचनात्मक कार्यों का अधिकांश हिस्सा पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा कट-एंड-कवर सेक्शन में ओवर्ट रिइन्फोर्समेंट और लाइनिंग का कार्य भी पूरा हो गया है। यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुरंग में रिफ्यूज निच (आपातकालीन शरण स्थल), रेस्क्यू शाफ्ट तथा वेंटिलेशन डक्ट का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है। सुरंग के भीतर पर्याप्त वायु संचार सुनिश्चित करने और घुटन की स्थिति से बचाव के लिए एग्जॉस्ट फैन लगाए जा रहे हैं। ये सभी व्यवस्थाएं भविष्य में सुरक्षित रेल संचालन और राहत-बचाव कार्यों में अहम भूमिका निभाएंगी।
आधुनिक तकनीक से समयबद्ध निर्माण
निर्माण विभाग शेष ड्रेनेज, बैकफिलिंग और अन्य सिविल कार्यों को तय समय में पूरा करने के लिए आधुनिक मशीनरी और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर रहा है, ताकि परियोजना निर्धारित अवधि में पूरी की जा सके।
परियोजना से मिलेगा क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा
इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना पूरी होने के बाद मध्यप्रदेश और गुजरात के बीच रेल संपर्क पहले से अधिक मजबूत होगा। इससे यात्रियों को तेज और सुविधाजनक रेल सेवाएं मिलेंगी, जबकि माल परिवहन की क्षमता बढ़ने से दोनों राज्यों के औद्योगिक, व्यापारिक और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी।









