इंदौर/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल करने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सांवेर विकासखंड के सरकारी स्कूलों में वर्ष 2006-07 की संविदा शिक्षक भर्ती के दौरान कथित तौर पर फर्जी D.Ed और B.Ed दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच चल रही है। जांच में फिलहाल 51 शिक्षकों की D.Ed अंकसूचियां संदिग्ध बताई जा रही हैं। इसके अलावा करीब 20 शिक्षकों की B.Ed योग्यता भी जांच के दायरे में होने की जानकारी सामने आई है। मामले में दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कई अहम गड़बड़ियां सामने आने का दावा किया गया है।
सत्यापन में सामने आईं कई अनियमितताएं
माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से किए गए दस्तावेज सत्यापन में कुछ अंकसूचियों के बोर्ड से जारी नहीं होने की जानकारी सामने आई। वहीं कुछ मामलों में एक ही रोल नंबर पर अलग-अलग परीक्षार्थियों के नाम से अंकसूची मिलने की बात भी सामने आई है। इन विसंगतियों के बाद संबंधित शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल खड़े हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सितंबर 2024 में संबंधित संकुल प्राचार्यों को संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, इसके बाद भी लंबे समय तक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
51 शिक्षकों पर FIR की तैयारी
अब इस मामले में 51 शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की तैयारी की जानकारी सामने आई है। वहीं लोकायुक्त ने इस पूरे मामले में 74 संदिग्ध शिक्षकों का रिकॉर्ड भी मांगा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि जांच का दायरा 51 शिक्षकों से आगे भी बढ़ सकता है। मामले में भोपाल STF की जांच का भी उल्लेख सामने आया है। जांच एजेंसियां भर्ती के समय जमा किए गए शैक्षणिक दस्तावेजों, उनके सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही हैं।
नाना पाटेकर का यादगार फिल्मी सफर… 75 वर्ष की उम्र में गोवा में निधन
करोड़ों रुपये वेतन लेने का दावा
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति साबित होती है, तो संबंधित शिक्षकों को वर्षों तक मिले वेतन और अन्य सरकारी लाभ का क्या होगा। दावा किया जा रहा है कि इन नियुक्तियों के बाद सरकारी खजाने से 100 करोड़ रुपये से अधिक का वेतन वितरित हो चुका है। हालांकि इस राशि की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
दस्तावेजों की होगी जांच
यह मामला उस दौर की संविदा शिक्षक भर्ती से जुड़ा है, जब मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री थे। अब लंबे समय बाद दस्तावेजों की जांच और FIR की कार्रवाई की तैयारी ने पुरानी भर्ती प्रक्रिया पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल जांच एजेंसियों की कार्रवाई और दस्तावेजों के अंतिम सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने शिक्षकों की नियुक्तियां वास्तव में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई थीं और इस मामले में आगे कितने लोगों पर कार्रवाई की जाती है।
दिल्ली में विपक्ष का प्रदर्शन… राहुल-प्रियंका को पुलिस ने हिरासत में लिया, धक्कामुक्की के आरोप









