इंदौर/खबर डिजिटल/ सागर के बंडा में अवैध शराब पीने से करीब 25 लोगों की मौत और उसके बाद कई लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की खबरों ने हिला कर रख दिया है। ये लोग कोई अपराधी नहीं थे, ना ही कोई जानवर कि इनकी जान की कीमत कुछ नहीं है। इनकी मौतों के बाद चारों तरफ मातम पसरा हुआ है। जवाब में सरकार ने कुछ अधिकारियों को सस्पेंड जरुर कर दिया गया है। इस कार्रवाई का नतीजा क्या होगा, इस पर बात करने की बजाय आज हम आपको प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की हकीकत बताने वाले हैं।
इंदौर शहर में आबकारी नियमों का कितना पालन
शासकीय शराब की दुकानों पर शराब की बोतल का रेट फिक्स होना चाहिए, बल्कि इसके इंदौर शहर की किसी भी वॉइन शॉप पर आप चले जाए, बल्क में शराब खरीदने पर आपको बोतलों के भाव से लगभग आधे दाम में शराब मुहैया करा दी जाएगी, इस तरह का क्यों हो रहा है, ये तो भगवान भरोसे ही है। शराब बंदी की तरफ बढ़ते प्रदेश का दावा करने वाले सूबे में खुलेआम कम दामों में शराब मुहैया कराई जा रही है, तो समझ सकते हैं, ब्रांडेड शराब की बोतलों की गुणवत्ता भी कितनी अच्छी होगी।
रातभर शराब की सप्लाई की व्यवस्था
शराब दुकानों के आसपास एक गुप्त खिड़की के जरिए इंदौर में रातभर शराब उपलब्ध कराई जा रही है, इससे कोई भी इंकार नहीं कर सकता है। जिसकी जानकारी खबर डिजिटल की टीम को काफी समय से मिल रही है, टीम ने इसको खुद जाकर देखा है कि यह बात बिल्कुल सही है, कि सही में ऐसा ही हो रहा है, तो सरकार अपने राजस्व का नुकसान करने की बजाय सभी दुकानों को रातभर खोलकर रख दे, ताकि सही तस्वीर तो जनता के सामने साफ हो।
अहाते बंद होने की बात झूठी
प्रदेशभर के अनुसार इंदौर शहर में अहाते बंद होने की बात बेमानी है, किसी भी शराब की दुकान पर पहले से बेहतर अहातों का संचालन किया जा रहा है, जबकि इसके जरिए सरकार को ही करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। जबकि वर्तमान अहाता संचालकों में भी जमकर प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। पुराने अहाता संचालकों से मिली जानकारी के मुताबिक रोजाना नए चेहरे बदलना शिगूफा हो गया है। अवैध अहाता संचालकों में भी जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है।
किसी दिन बड़ी जनहानि के संकेत
बल्क में सस्ती शराब उपलब्ध कराने के पीछे शराब दुकान संचालकों की मंशा प्रतिस्पर्धा हो सकती है, लेकिन इस पर सरकार की नजर क्यों नहीं पड़ रही है। जबकि सागर शराब कांड के बाद सरकार को सबक लेने की जरुरत है, कि आबकारी नीति के अनुसार ही शराब दुकान का संचालन किया जाए, वरना आने वाले वक्त में चुनावों में सरकार की छवि पर इसका असर पड़ना लाजिमी है।
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