डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी, विकास के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाने वालों के लिए डिंडौरी जिला पंचायत से बड़ी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत मिली लाखों की राशि डकारने वाले ग्राम पंचायत रकरिया के पूर्व सरपंच शिवनंदन सिंह उईके को अब सलाखों के पीछे दिन काटने पड़ेंगे। बिना कोई ईंट रखे 5 लाख रुपये निकाल लेने और सरकारी तिजोरी में बकाये पैसे वापस न करने पर जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व सरपंच को 30 दिनों के सीधे कारावास का फरमान सुनाया है।
कागजों में चमकी योजना, जमीन पर 'शून्य' निर्माण
मामला वर्ष 2017-18 का है, जब पोषक ग्राम सूरजपुरा में ग्रामीणों की सुविधा के लिए ग्राम चौपाल और सामुदायिक शौचालय के निर्माण को स्वीकृति मिली थी। दोनों कामों के लिए ढाई-ढाई लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। कागजों में तो काम पूरा दिखाकर 5 लाख रुपये का आहरण भी कर लिया गया, लेकिन जब जांच टीम मौके पर पहुंची तो चौपाल और शौचालय की जगह सिर्फ खाली जमीन नजर आई। वित्तीय धांधली की पोल खुलते ही पंचायत राज अधिनियम की धारा-89 के तहत पूर्व सरपंच और सचिव पर देयता तय कर दी गई।
पूर्व सचिव ने चुकाए पैसे, पूर्व सरपंच टालते रहे मामला
जांच और देयता तय होने के बाद पूर्व सचिव ने ईमानदारी दिखाते हुए अपने हिस्से के ₹2.50 लाख शासकीय कोष में जमा कर दिए। वहीं पूर्व सरपंच शिवनंदन सिंह उईके ने केवल 50 हजार रुपये जमा कर हाथ खींच लिए। शेष 2 लाख रुपये की वसूली के लिए प्रशासन ने उन्हें कई मौके दिए, पर बकाया राशि जमा नहीं की गई।
अंतिम अल्टीमेटम भी नजरअंदाज, फिर जारी हुआ जेल वारंट
प्रशासनिक ढील का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे पूर्व सरपंच के खिलाफ धारा-92 के तहत केस दर्ज किया गया। 29 जनवरी 2026 को न्यायालय ने अंतिम मौका देते हुए 15 दिन के भीतर राशि जमा करने का आदेश जारी किया था। जब यह मोहलत भी बीत गई, तो सीईओ जिला पंचायत श्री दिव्यांशु चौधरी के न्यायालय ने सख्त कदम उठाया। 31 अगस्त 2026 को अंतिम वारंट जारी करते हुए पुलिस को पूर्व सरपंच को तत्काल गिरफ्तार कर 30 दिनों के लिए जेल भेजने का आदेश दे दिया गया। इस कठोर प्रशासनिक कार्रवाई से जिले के भ्रष्ट नुमाइंदों में हड़कंप मच गया है।









