भोपाल/ खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने केंद्र सरकार द्वारा 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसानों की भावनाओं को समझने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद, लेकिन केवल MSP की घोषणा कर देना किसानों के साथ न्याय नहीं है। देश और मध्यप्रदेश के किसानों को आज भी उनकी उपज का वास्तविक समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है।
जीतू पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश के सांसद, पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश के किसानों को यह बताना चाहिए कि आखिर मध्यप्रदेश में कौन-सी फसल वास्तव में MSP पर बिक रही है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि दावा कर रही है कि किसानों को MSP का लाभ मिल रहा है तो इसका भौतिक सत्यापन कराया जाए और सच्चाई जनता के सामने रखी जाए।
उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों की जादूगरी और घोषणाओं के माध्यम से किसानों को गुमराह करना उचित नहीं है। जमीनी स्थिति यह है कि दलहन, तिलहन, मोटा अनाज, सरसों सहित अधिकांश खरीफ फसलें MSP से नीचे बिक रही हैं मूंग किसानों को MSP क्यों नहीं मिल रहा, जवाब दें मोहन यादव सरकार और किसान मजबूरी में अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को विवश हैं।
जीतू पटवारी ने कहा कि किसान अपनी आर्थिक परिस्थितियों, कर्ज और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण कम दाम पर उपज बेचने को मजबूर होता है, लेकिन व्यापारी और खरीददार उसकी मजबूरी का लाभ उठाते हैं। इसलिए यदि केंद्र सरकार वास्तव में किसानों का हित चाहती है तो MSP से नीचे खरीद करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रश्न उठाते हुए कहा कि क्या केंद्र सरकार और भाजपा MSP से नीचे खरीद को अपराध घोषित करने का साहस दिखाएगी? क्या देश में किसानों के हित में ऐसा कानून बनेगा? क्या मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों को MSP की कानूनी गारंटी देंगे?
जीतू पटवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार को केवल “मोदी गारंटी” का प्रचार नहीं करना चाहिए, बल्कि किसानों को वास्तविक सुरक्षा और न्याय देना चाहिए। MSP केवल घोषणा नहीं, बल्कि कानूनी अधिकार बनना चाहिए।
उन्होंने प्रदेश के किसान भाइयों से आह्वान करते हुए कहा कि वे सरकार की घोषणाओं और जमीनी सच्चाई के बीच के अंतर को समझें तथा अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहें। किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि उनकी उपज का न्यायपूर्ण मूल्य चाहिए।









