बिजनौर/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पिता स्वर्गीय महेंद्रनाथ की जमीन से जुड़ा कथित धोखाधड़ी का मामला उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में सामने आया है। आरोप है कि जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से फर्जी वसीयत और मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार किए गए। मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिनमें से दो आरोपियों धर्मपाल और विजय शंकर को गिरफ्तार कर लिया गया है।
26 बीघा जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी
मामला बिजनौर जिले की नजीबाबाद तहसील के अमीखानपुर गांव का बताया जा रहा है। यहां कमलनाथ के पिता महेंद्रनाथ के नाम करीब 90 बीघा जमीन दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसी जमीन में से 26 बीघा भूमि को लेकर कथित दस्तावेजी धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। शिकायत के मुताबिक, जमीन पर अपना अधिकार जताने के लिए आरोपियों ने वर्ष 1998 की कथित फर्जी वसीयत तैयार की। इसके अलावा महेंद्रनाथ का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने का भी आरोप है।
वास्तविक मृत्यु से पहले की तारीख दर्शाने का आरोप
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, कथित मृत्यु प्रमाणपत्र में महेंद्रनाथ की मृत्यु की तारीख 10 अप्रैल 2003 दर्ज की गई थी, जबकि उपलब्ध वास्तविक रिकॉर्ड के मुताबिक उनका निधन 7 सितंबर 2004 को हुआ था। इस तरह दस्तावेज में दर्ज मृत्यु की तारीख और वास्तविक रिकॉर्ड में करीब डेढ़ वर्ष का अंतर बताया जा रहा है। आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल जमीन की विरासत अपने नाम दर्ज कराने के लिए किया जाना था।
विरासत दर्ज कराने के आवेदन से सामने आया मामला
बताया जा रहा है कि 18 मई 2026 को जमीन की विरासत दर्ज कराने के लिए आवेदन की प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस से की गई। पुलिस ने 30 सितंबर 2026 को चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने धर्मपाल और विजय शंकर को गिरफ्तार किया। दोनों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजे जाने की जानकारी है।
फर्जी वसीयत और राजस्व रिकॉर्ड की जांच जारी
पुलिस अब कथित फर्जी वसीयत, मृत्यु प्रमाणपत्र और जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दस्तावेज किसने तैयार किए, उनका इस्तेमाल कैसे किया गया और कथित धोखाधड़ी में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। फिलहाल मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका और दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच जारी है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।









