KamalNath: मध्यप्रदेश की हाई-प्रोफाइल सियासत और कांग्रेस के अभेद्य गढ़ माने जाने वाले छिंदवाड़ा में सोमवार को उस समय बबंडर खड़ा हो गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधायक कमलनाथ के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए क्षेत्र में लापता के पोस्टर लगा दिए गए। छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के सुदूर ग्राम जैतपुर में रातों-रात लगे विवादित पोस्टरों ने सूबे के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है, जिससे भाजपा और कांग्रेस के बीच एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है।
जलसंकट बना मुद्दा
दरअसल, मानसून की लेटलतीफी और गर्मी के चलते ग्रामीण इलाकों में पानी का हाहाकार मचा हुआ है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि पेयजल संकट से जनता बेहाल है, लेकिन विधायक होने के बावजूद कमलनाथ क्षेत्र से नदारद हैं। पोस्टरों में लिखा गया है कि विधायक जी जनता की समस्याओं और क्षेत्र की जमीनी हकीकत से कोसों दूर बने हुए हैं। स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का दावा है कि पीड़ित जनता की आवाज को बुलंद करने के लिए ही यह सही तरीका है।
कमजोर पड़ता प्रभाव
आपको बता दें कि दशकों से छिंदवाड़ा को कमलनाथ का अभेद्य साम्राज्य माना जाता रहा है। लेकिन उनके ही निर्वाचन क्षेत्र में लापता विधायक के पोस्टर लगना यह साफ संकेत देता है कि भाजपा अब आक्रामक मोड पर आकर कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में सेंधमारी कर रही है। इन पोस्टरों के जरिए भाजपा ग्रामीण इलाकों में यह संदेश फैलाने में कामयाब हो रही है कि अब जनता खुद अपने जनप्रतिनिधि से जवाब मांग रही है।
क्षेत्र में होने लगी चर्चाएं
जैतपुर और आसपास की चौपालों पर इन पोस्टरों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ ग्रामीण इसे चुनावी खुन्नस और राजनीति मान रहे हैं, तो वहीं कई स्थानीय निवासियों का साफ कहना है कि बड़े नेताओं को समय-समय पर भोपाल-दिल्ली छोड़कर अपनी जनता के बीच आकर कमान संभालनी चाहिए।
लोकसभा चुनाव के बाद मिजाज!
यह भी बता दे कि बीते लोकसभा चुनावों के बाद से ही छिंदवाड़ा की राजनीति में बदलाव देखने को मिल रहे हैं। भाजपा जहां पूरे जिले में खुद को स्थापित करने के लिए ताबड़तोड़ सक्रिय है, वहीं कांग्रेस अपनी सियासी जमीन बचाने की जद्दोजहद में जुटी है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह पोस्टर वॉर आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों की बड़ी रणनीतिक का हिस्सा है।







