भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की कमजोर पैरवी और अधूरी जानकारी के कारण ओबीसी आरक्षण के मामले में हाईकोर्ट में कांग्रेस सरकार के समय लागू किए गए 27 प्रतिशत आरक्षण को झटका लगा है। कमलनाथ ने ओबीसी वर्ग को उसका अधिकार दिलाने के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ने की बात कही है।
कमलनाथ ने 2019 के फैसले का किया जिक्र
कमलनाथ ने अपनी पोस्ट में कहा कि वर्ष 2019 में उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान कांग्रेस सरकार ने मध्यप्रदेश में अन्य राज्यों की तरह ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया था। उनके मुताबिक, इसके बाद से ही भाजपा सरकारें इस आरक्षण को समाप्त करने की कोशिश करती रही हैं।
भाजपा सरकार पर कमजोर पैरवी का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की ओर से अदालत में प्रभावी तरीके से पक्ष नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि कमजोर पैरवी और आधी-अधूरी जानकारी के कारण ओबीसी वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर प्रतिकूल स्थिति बनी है। कमलनाथ ने इसे ओबीसी समाज के साथ अन्याय बताते हुए भाजपा पर अदालत में कमजोर पक्ष रखने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा शुरू से ही आरक्षण के पक्ष में नहीं रही और वह अदालत के जरिए इसे समाप्त कराने की कोशिश कर रही थी। ये आरोप कमलनाथ ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए हैं।
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ओबीसी आरक्षण की लड़ाई जारी रखने का ऐलान
कमलनाथ ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि ओबीसी वर्ग के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस 27 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
आरक्षण के मुद्दे पर बढ़ सकती है सियासी हलचल
मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय रहा है। कमलनाथ के ताजा बयान से इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश का वास्तविक दायरा, प्रभावित पदों या प्रक्रियाओं की स्थिति और आगे की कानूनी कार्रवाई को समझने के लिए संबंधित न्यायिक आदेश का विस्तृत अध्ययन जरूरी है। कमलनाथ ने अपनी पोस्ट में राज्य सरकार की पैरवी पर सवाल उठाते हुए 27 प्रतिशत आरक्षण की लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया है।
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