डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडौरी जिले से एक ऐसी मनमोहक तस्वीर उभरकर सामने आ रही है, जो इंसानी सहभागिता और वन्यजीव प्रेम की अनूठी मिसाल बन चुकी है। जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर, जबलपुर-अमरकंटक मार्ग के पास स्थित कारोपानी क्षेत्र में आज भी प्रकृति अपनी पूरी रंगत में मुस्कुराती है। यहाँ 'कारोपानी प्राकृतिक हिरण पार्क' में काले हिरणों की अठखेलियाँ और कुलांचे भरती टोली किसी का भी दिल मोह लेती हैं।
कारोपानी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ वन्यजीवों को चिड़ियाघर या लोहे के बाड़ों में सीमित नहीं रखा गया है। इसके बजाय उनके संपूर्ण प्राकृतिक परिवेश, खुले पठारी मैदानों और हरी-भरी वादियों को उसी मूल रूप में संरक्षित किया गया है। खुले मैदानों में बेखौफ घूमते काले हिरणों के बड़े-बड़े झुंड न केवल इस क्षेत्र की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं, बल्कि यहाँ की जैव विविधता को भी समृद्ध करते हैं।

ग्रामीणों का अपनापन बना सुरक्षा का कवच
किसी भी वन्यजीव क्षेत्र के सफल संरक्षण में सबसे बड़ा योगदान स्थानीय लोगों का होता है। कारोपानी में वन्यजीव संरक्षण की यह अलख ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता से ही जल रही है। यहाँ के गाँव वालों ने इन हिरणों को केवल 'जंगली जानवर' न मानकर अपने परिवार के हिस्से की तरह अपनाया है। इंसानों और बेजुबानों के बीच का यह सामंजस्य और अपनापन ही है, जिसने हिरणों के लिए एक अत्यंत सुरक्षित और अनुकूल माहौल तैयार किया है।
जबलपुर-अमरकंटक मार्ग के मुख्य रास्ते पर होने के कारण कारोपानी अब पर्यटन के नक्शे पर तेजी से उभर रहा है। खुले मैदानों में हिरणों को स्वच्छंद रूप से दौड़ते देखना यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव बन जाता है।
ग्रामीण जीवन, वन्यजीवों के मुक्त विचरण और प्राकृतिक शांत माहौल का यह त्रिवेणी संगम डिंडौरी जिले को पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिला रहा है।
कारोपानी आज सिर्फ हिरणों का एक प्राकृतिक आवास भर नहीं है, बल्कि यह "प्रकृति संरक्षण, स्थानीय सहभागिता और पर्यटन की संभावनाओं" के अद्भुत संगम की जीवंत मिसाल है। यहाँ हवा से बातें करते और दौड़ते हिरण डिंडौरी की उस प्राकृतिक विरासत का संदेश दे रहे हैं, जिसे आने वाली नस्लों के लिए संभालकर रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।







