सौरभ श्रीवास्तव संवाददाता कटनी/ढीमरखेड़ा।जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र अंतर्गत निगईं गेहूं उपार्जन केंद्र एक बार फिर विवादों में घिर गया है। किसानों ने केंद्र पर तुलाई के नाम पर खुली लूट का आरोप लगाया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उपार्जन केंद्र में प्रति क्विंटल गेहूं की तौल पर किसानों से लगभग 3 किलो गेहूं अलग से लिया जा रहा है। इसे तुलाई, सिलाई और लेबर चार्ज के नाम पर वसूला जा रहा है।किसानों का कहना है कि शासन द्वारा तुलाई, सिलाई, लेबर और परिवहन सहित सभी खर्चों का भुगतान पहले से केंद्र प्रभारियों को किया जाता है। इसके बावजूद किसानों से अतिरिक्त गेहूं लेना सीधे तौर पर अन्नदाताओं के साथ अन्याय और आर्थिक शोषण है।आरोप है कि मजबूर किसान खुलकर विरोध भी नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि केंद्र प्रभारियों द्वारा दबाव बनाया जाता है कि शिकायत करने पर उनकी फसल खरीदी नहीं जाएगी। ऐसे में किसान मजबूरी में चुपचाप अपनी उपज कटवाने को मजबूर हैं।किसानों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि शासन किसानों के हितों की बात करता है, तो खरीदी केंद्रों पर हो रही इस तरह की अवैध वसूली पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। किसानों का आरोप है कि प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही के कारण उपार्जन केंद्रों पर मनमानी चरम पर है।वहीं दूसरी ओर ढीमरखेड़ा क्षेत्र के कई खरीदी केंद्रों की वेयरहाउस मैपिंग जबलपुर जिले में किए जाने से भी किसानों और परिवहनकर्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि जब कटनी जिले में पर्याप्त वेयरहाउस उपलब्ध हैं, तो फिर जिले के गेहूं का स्टॉक दूसरे जिले में क्यों भेजा जा रहा है। इससे परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ रहे हैं।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेकर जांच करेगा, या फिर अन्नदाता इसी तरह खरीदी केंद्रों पर शोषण झेलता रहेगा।
किसानों से तुलाई के नाम पर खुली लूट? सिलोंडी निगईं उपार्जन केंद्र क्रमांक 1पर गंभीर आरोप
Khabar Digital Desk
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