सिवनी/खबर डिजिटल/वन्देवार संतोष/ मध्यप्रदेश के सिवनी के खैरा-पलारी क्षेत्र, जिसे "मिनी पंजाब" के नाम से जाना जाता है, इन दिनों किसानों की गंभीर समस्याओं के कारण चर्चा में है। देश का अन्नदाता कहलाने वाला किसान खरीफ सीजन की शुरुआत में खाद-बीज की व्यवस्था के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। किसानों का आरोप है कि क्षेत्र में खाद-बीज विक्रेता उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाने दामों पर कृषि सामग्री बेच रहे हैं।
किसानों के अनुसार, डीएपी, यूरिया सहित अन्य खाद एवं बीज निर्धारित दरों पर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। कई दुकानदार सरकारी दरों को दरकिनार कर ऊंची कीमतों पर बिक्री कर रहे हैं, जिससे किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद-बीज की कमी के कारण किसान साहूकारों से कर्ज लेने और आर्थिक संकट झेलने को मजबूर हैं।
क्षेत्र के किसानों ने यह भी आशंका जताई है कि कुछ स्थानों पर नकली या निम्न गुणवत्ता वाली कीटनाशक दवाइयों और बीजों की बिक्री भी हो रही है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
किसानों का कहना है कि प्रशासन द्वारा नियमित जांच और निगरानी नहीं किए जाने से कालाबाजारी करने वालों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने कृषि विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि खाद-बीज दुकानों की सघन जांच कर निर्धारित दरों पर सामग्री उपलब्ध कराई जाए तथा दोषी विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
खरीफ सीजन के महत्वपूर्ण समय में खाद-बीज की किल्लत और कथित कालाबाजारी ने खैरा-पलारी क्षेत्र के किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अब किसानों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।
किसानों का कहना है कि दुकानदारों द्वारा डीएपी और यूरिया की कृत्रिम कमी पैदा कर अधिक कीमत वसूली जा रही है। वहीं कई जगहों पर खाद के साथ अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव भी बनाया जा रहा है। आरोप यह भी हैं कि क्षेत्र में कुछ विक्रेताओं द्वारा संदिग्ध एवं डुप्लीकेट कृषि दवाइयों की बिक्री की जा रही है, जिससे किसानों की फसल और आर्थिक स्थिति दोनों खतरे में पड़ रही हैं।क्षेत्र के किसानों ने बताया कि खेती का समय होने के बावजूद उन्हें समय पर खाद नहीं मिल रही है।
सरकारी व्यवस्था और निगरानी तंत्र की कमजोरी….
सरकारी व्यवस्था और निगरानी तंत्र की कमजोरी का फायदा उठाकर कुछ कारोबारी खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।किसानों का आरोप है कि संबंधित विभाग को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द सख्त कदम नहीं उठाए तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। खेती-किसानी के महत्वपूर्ण समय में खाद-बीज की कालाबाजारी और नकली दवाइयों का कारोबार किसानों की मेहनत पर सीधा हमला है।
किसानों ने जिला प्रशासन, कृषि विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि खाद-बीज दुकानों की तत्काल जांच कराई जाए, स्टॉक और बिक्री रजिस्टर की पड़ताल हो तथा कालाबाजारी और नकली सामग्री बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
किसानों का सवाल….
"जब सरकार किसानों को राहत देने और समय पर खाद उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, तो आखिर खैरा-पलारी क्षेत्र में खाद-बीज माफिया किसके संरक्षण में किसानों का शोषण कर रहे हैं?"
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल….
खैरा-पलारी क्षेत्र में लगातार सामने आ रही शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मनमानी और कालाबाजारी आने वाले दिनों में और भी विकराल रूप ले सकती है।
बिना पक्के बिल के हो रही बिक्री, टैक्स चोरी की भी आशंका…..
खैरा-पलारी क्षेत्र के किसानों ने आरोप लगाया है कि कई खाद-बीज विक्रेता डीएपी, यूरिया, कृषि दवाइयों एवं अन्य कृषि सामग्री की बिक्री के दौरान पक्का बिल देने से बच रहे हैं। किसानों का कहना है कि दुकानदार मनमाने दामों पर सामग्री बेच रहे हैं, लेकिन खरीदारी के बाद बिल मांगने पर टालमटोल की जाती है या फिर कच्ची पर्ची थमा दी जाती है।
किसानों के अनुसार पक्का बिल नहीं मिलने से न केवल खरीदारों के अधिकारों का हनन हो रहा है, बल्कि शासन को मिलने वाले राजस्व पर भी असर पड़ सकता है। क्षेत्र में चर्चा है कि कुछ दुकानदार बिलिंग प्रक्रिया से बचकर टैक्स चोरी कर रहे हैं और इसका सीधा नुकसान सरकारी खजाने को उठाना पड़ रहा है।
किसानों ने मांग की है कि प्रशासन खाद-बीज दुकानों के स्टॉक, बिक्री रजिस्टर, जीएसटी बिल और खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड की गहन जांच कराए। यदि बिना बिल बिक्री, अधिक मूल्य वसूली या टैक्स चोरी की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों के साथ हो रहे आर्थिक शोषण पर रोक लग सके।









