डिंडौरी जिले के समनापुर क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली और दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां प्रकृति के उग्र रूप और उफनती नदी के बीच एक भारी-भरकम ट्रक को पानी के तेज बहाव के बीच से गुजार दिया गया। यह घटना न केवल प्रशासनिक दावों की पोल खोलती है, बल्कि सड़क सुरक्षा के उन तमाम नियमों को भी आईना दिखाती है जो अक्सर कागजों तक ही सीमित नजर आते हैं।
बरसात के इस मौसम में अंचल की नदियां और नाले अपने पूरे शबाब पर हैं। ऐसे में समनापुर मार्ग पर स्थित खरमेर नदी का पुल पानी में पूरी तरह डूबा हुआ था। नियमों के मुताबिक, जलमग्न पुलों पर किसी भी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित होनी चाहिए। इसके बावजूद, एक भारी ट्रक का इस खतरनाक रास्ते से गुजारना किसी बड़े हादसे को सीधा न्योता देने जैसा था। सबसे बड़ा और चुभने वाला सवाल यह है कि जब जिला प्रशासन और पुलिस लगातार यह मुनादी करवा रहे हैं कि उफनते पुलों को पार करने का जोखिम न उठाया जाए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुल के दोनों छोर पर न तो कोई बैरिकेडिंग की गई थी, यदि थोड़ी सी भी चूक हो जाती और ट्रक तेज धार में असंतुलित होकर बह जाता, तो इस संभावित जनहानि का जिम्मेदार कौन होता? स्थानीय नागरिकों और राहगीरों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि हर साल बरसात के दिनों में ऐसे हालात बनते हैं, इसके बावजूद प्रशासन किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार क्यों करता है?
अब जरूरत इस बात की है कि केवल कागजी चेतावनियों के इश्तेहार जारी करने के बजाय मैदानी स्तर पर सख्त और कड़े कदम उठाए जाएं। खरमेर पुल जैसी संवेदनशील जगहों पर स्थायी बैरियर और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जानी चाहिए ताकि कोई भी वाहन चालक अपनी और दूसरों की जान को खतरे में डालने की हिम्मत न कर सके।









