भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में गर्मी के मौसम में होने वाली मूंग की रिकॉर्ड खरीदी अब सरकार के लिए आर्थिक चुनौती बनती जा रही है। समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदी गई अतिरिक्त मूंग के कारण राज्य सरकार को पिछले दो वित्तीय वर्षों में करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं, वर्ष 2025-26 की खरीदी गई अतिरिक्त मूंग के कारण 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये तक के संभावित नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है।
किसानों को हो रहा भारी नुकसान
केंद्र सरकार हर वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के साथ राज्यों के लिए खरीदी का एक निर्धारित कोटा तय करती है। पिछले तीन वर्षों से मध्य प्रदेश इस निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में मूंग की खरीदी कर रहा है। केंद्र अतिरिक्त खरीदी गई उपज का उठाव नहीं करता, जिसके चलते राज्य सरकार को उसे खुले बाजार में निविदा (टेंडर) के माध्यम से बेचना पड़ता है। बाजार में समर्थन मूल्य से कम कीमत मिलने के कारण सरकार को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।
केंद्र के कोटे से ज्यादा खरीदी मूंग
आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्रदेश सरकार ने किसानों से 5.60 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी, जिसमें 2.84 लाख मीट्रिक टन केंद्र के निर्धारित कोटे से अधिक थी। इसके बाद वर्ष 2024-25 में 5.80 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीदी हुई, जो तय लक्ष्य से 2.49 लाख मीट्रिक टन ज्यादा रही। दोनों वर्षों में कुल 5.33 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त मूंग समर्थन मूल्य पर खरीदी गई।
कई बार टेंडर किए जारी
जानकारी के अनुसार, यह मूंग लगभग 8,682 से 8,768 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी गई थी, लेकिन जब इसे खुले बाजार में बेचने के लिए टेंडर जारी किए गए तो व्यापारी समर्थन मूल्य से 1,500 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत देने को तैयार हुए। बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में कई बार टेंडर निरस्त किए गए, लेकिन अंततः कम कीमत पर बिक्री करनी पड़ी, जिससे करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
किसान आंदोलन का दिखाई दिया असर
भोपाल में किसानों के आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी की सीमा बढ़ा दी। पहले प्रति एकड़ लगभग 120 किलोग्राम मूंग खरीदी जाती थी, जिसे बढ़ाकर 300 किलोग्राम कर दिया गया। इस फैसले के बाद प्रदेश की मंडियों में मूंग की आवक कम हो गई, जबकि कीमतों में 300 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।अनाज कारोबारी के अनुसार, फैसले के बाद एक दिन में मंडियों में मूंग की आवक लगभग 25 हजार क्विंटल से घटकर 20 हजार क्विंटल रह गई। वहीं, अधिकतम बाजार भाव 7,605 रुपये और मॉडल भाव करीब 6,900 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।
मूंग की गुणवत्ता पर सवाल
मूंग की गुणवत्ता को लेकर भी बहस जारी है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फसल में अत्यधिक कीटनाशकों के उपयोग से गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है, तो इसकी वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए। यदि जांच में कोई समस्या सामने आती है तो आवश्यक कदम उठाए जाएं और यदि गुणवत्ता सुरक्षित पाई जाती है तो कीटनाशकों के उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि राज्य में उत्पादित पूरी मूंग की खरीदी के लिए केंद्र सरकार स्थायी समाधान निकाले।









