BJP Politics: छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी के अंदर चल रही सांगठनिक सर्जरी ने सभी को चौंका दिया है। प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक के बाद जो सूची सामने आई है, उसने पार्टी के अंदर एक नई बहस छेड़ दी है। पहली बार ऐसा देखा जा रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में निर्वाचित विधायकों को सांगठनिक इकाई से दूर रखा गया है।
अनदेखी या नई रणनीति?
पार्टी की परंपरा रही है कि सभी सांसदों और विधायकों को प्रदेश कार्यसमिति में जगह दी जाती है, लेकिन इस बार का गणित बिल्कुल अलग है। भाजपा के कुल 54 विधायकों में से केवल 14 मंत्रियों और 17 विधायकों को ही कार्यसमिति में स्थान मिला है। सुशांत शुक्ला, भैयालाल राजवाड़े, अनुज शर्मा, ललित चंद्राकर, धर्मजीत सिंह, ईश्वर साहू और प्रबोध मिंज जैसे नाम इस बार सूची से बाहर हैं। बैठक में निगम-मंडल अध्यक्षों और जिला प्रभारियों की मौजूदगी के बावजूद कई विधायकों की अनुपस्थिति को संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती दूरी के रूप में देखा जा रहा है।
युवा जोश पर दांव
संगठन ने केवल कार्यसमिति ही नहीं, बल्कि कोर कमेटी का भी कायाकल्प कर दिया है। नई टीम में ओ.पी. चौधरी, विजय शर्मा, अमर अग्रवाल, लता उसेंडी और शिवरतन शर्मा जैसे नेताओं को शामिल कर "नई पीढ़ी, नई रणनीति" का संदेश दिया गया है। इसके अलावा कई वरिष्ठ नेताओं को कोर कमेटी से बाहर कर दिया गया है।
जून तक मिलेगा नया प्रभारी!
छत्तीसगढ़ भाजपा में बदलाव का सिलसिला अभी थमा नहीं है। राष्ट्रीय नेतृत्व में चल रही प्रक्रियाओं के कारण प्रदेश को नया प्रभारी मिलने का मामला फिलहाल लंबित है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि जून तक राज्य को नया मार्गदर्शक मिल जाएगा।
सादगी पर उठे सवाल
संगठनात्मक अनुशासन को लेकर भी गलियारों में चर्चा तेज है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सादगी और छोटे काफिलों की बात करते हैं, वहीं प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान वाहनों के भारी जमावड़े ने विपक्ष को सवाल उठाने का मौका दे दिया है।









