सौरभ श्रीवास्तव संवाददाता कटनी/छपरा जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र अंतर्गत छपरा में संचालित चालू एवं बंद पड़ी मार्बल खदानों में भारी लापरवाही और अनियमितताओं का मामला सामने आया है। यहां कई ऐसी खदानें हैं जिनकी लीज समाप्त हो चुकी है, लेकिन उन्हें नियमों के अनुसार बंद नहीं किया गया। 100 से 150 फीट गहरी खुली खदानें बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के मौत को खुला न्योता दे रही हैं।ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि बंद पड़ी खदानों के आसपास ना तो तार फेंसिंग की गई है और ना ही किसी प्रकार के चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। खुले गड्ढों में गिरकर जानवरों और इंसानों की मौत की आशंका लगातार बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार खनिज विभाग आंखें मूंदे बैठा है।वहीं चालू मार्बल खदानों में काम कर रहे श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। श्रमिक बिना हेलमेट, बिना सेफ्टी बेल्ट और बिना किसी सुरक्षा उपकरण के गहरी खदानों में उतरकर काम करने को मजबूर हैं। नियमों के मुताबिक खदान संचालकों को श्रमिकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम करना अनिवार्य है, लेकिन यहां खुलेआम श्रम विभाग और खनिज विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी दिन बड़ा हादसा हो गया तो इसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? खदान मालिक, खनिज विभाग या श्रम विभाग?हैरानी की बात यह है कि जब इस पूरे मामले में खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो अधिकारियों ने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभागीय जिम्मेदार कितने गंभीर हैं।नियमों के अनुसार लीज समाप्त होने के बाद खदानों को सुरक्षित तरीके से बंद किया जाना चाहिए, लेकिन कई खदान मालिक खदानों को खुला छोड़कर गायब हो चुके हैं। इसके बावजूद खनिज विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार विभाग कब जागेगा? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन हरकत में आएगा या फिर इसी तरह कार्यालयों में बैठकर कुर्सियां तोड़ी जाती रहेंगी? छपरा की ये खुली मार्बल खदानें प्रशासनिक लापरवाही की भयावह तस्वीर पेश कर रही हैं, जहां इंसानी जिंदगी की कीमत शायद कुछ भी नहीं रह गई है।
खबर डिजिटल संवाददाता सौरभ श्रीवास्तव कटनी मो. 9131308097









