MP Cabinet Expansion: मध्यप्रदेश के राजनैतिक गलियारों से सियासत को हिला देने वाली खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहटों के बीच, सूबे की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के खिलाफ एक बड़ एक्शन लिया गया है। आयुक्त, अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा मंत्री बागरी को एक नोटिस जारी किया गया है, जिसने प्रदेश की सियासत का पारा चरम पर पहुंचा दिया है। पूरा विवाद उनकी जाति और पैतृक दस्तावेजों से जुड़ा है।
कमिश्नर का नोटिस
दरअसल, अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त द्वारा जारी नोटिस में राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को जांच बैठक में व्यक्तिगत और अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश जारी किए गए हैं। जारी नोटिस के तहत राज्य मंत्री के सामने साक्ष्यों को साबित करने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। प्रतिमा बागरी को समिति के सामने ऐसे दस्तावेज पेश करने होंगे, जिससे यह साबित हो सके कि साल 1950 की स्थिति में उनका परिवार मूल रूप से मध्य प्रदेश के सतना जिले का निवासी था और अनुसूचित जाति वर्ग के अंतर्गत आता था।
कोर्ट के हंटर के बाद एक्शन
बता दें कि बीते दिनों माननीय न्यायालय की ओर से भी प्रतिमा बागरी की जाति की वैधता को लेकर एक नोटिस जारी किया गया था। कोर्ट के निर्देशों को संज्ञान में लेते हुए अब राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने कमान संभालते हुए जांच को तेज कर दिया है।
जाएगी मंत्री की कुर्सी?
इस बड़ी प्रशासनिक सर्जरी के बाद राजनैतिक जानकारों का मानना है कि यदि छानबीन समिति की जांच में प्रतिमा बागरी के दस्तावेजों में कोई कमी पाई जाती है, तो न केवल उनकी विधायकी बल्कि उनका मंत्री पद भी खतरे में पड़ सकता है। यह भी बता दे कि मंत्री बागरी की जाति का मामला प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने याचिका लगाकर उठाया था।







