MP BJP Action: मध्यप्रदेश के गुना जिले से शुरू हुआ बिजली कटौती का मुद्दा अब एक बड़े राजनैतिक भूचाल में तब्दील हो चुका है। गुना से भाजपा के सीनियर विधायक पन्नालाल शाक्य द्वारा अपनी ही सरकार के दो कद्दावर मंत्रियों के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। पार्टी संगठन ने विधायक के विरोध को अनुशासनहीनता माना है और उनके खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
ऐसी बयानबाजी बर्दाश्त नहीं
पूरे सियासी घटनाक्रम पर भाजपा के गुना जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सिकरवार ने बीते रविवार को मीडिया से चर्चा करते हुए विधायक पन्नालाल शाक्य के बयानों पर आपत्ति जताई। जिलाध्यक्ष ने साफ कहा कि भाजपा एक अनुशासित दल है। यहां अपनी बात, शिकायत या क्षेत्र की समस्याओं को रखने के लिए बकायदा उचित प्लेटफॉर्म और फोरम मौजूद हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों या मीडिया के सामने जाकर अपनी ही सरकार के कैबिनेट मंत्रियों को नाकारा करार देना पूरी तरह से गलत है। चाहे कोई मंत्री हो, विधायक हो या बड़ा पदाधिकारी, पार्टी में इस तरह की बयानबाजी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हाईकमान को भेजी रिपोर्ट
सिकरवार ने बताया कि विधायक शाक्य के बयानों से प्रदेश भाजपा संगठन को लिखित में अवगत करा दिया गया है। जल्द ही भोपाल से उनके खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जा सकता है। जिलाध्यक्ष के बयानों से साफ संकेत मिलते है कि विधायक शाक्या अब खतरे में आ सकते है। राजनैतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है कि विधायक जी को बीजेपी पार्टी से निष्कासित करने का कदम उठा सकती है।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, गुना में हो रही बिजली कटौती से नाराज होकर विधायक पन्नालाल शाक्य ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी और दो कद्दावर मंत्री, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ बयानबाजी की थी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से मंत्रियों पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद से ही गुना की राजनीति का पारा चढ़ा हुआ है।
आप नेता ममता मीना की एंट्री
इस राजनीतिक कलह के बीच अब विपक्ष की एंट्री भी हो गई है। आम आदमी पार्टी की फायरब्रांड नेता और पूर्व विधायक ममता मीना खुलकर भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य के समर्थन में मैदान में उतर आई हैं। ममता मीना ने इस विवाद को नई भाजपा बनाम पुरानी भाजपा का रंग देते हुए कहा कि वर्तमान में महाराज के आने के बाद जो नई भाजपा बनी है, उसमें पार्टी के पुराने, मूल और समर्पित कार्यकर्ता भारी घुटन महसूस कर रहे हैं। उन्होंने प्रभारी मंत्री द्वारा भाजपा विधायक को मंच पर कथित रूप से धक्का दिए जाने वाले एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए तंज कसा कि जब सत्ता के नशे में चूर नेता एक सीनियर विधायक की आवाज को दबा रहे हैं और अधिकारी उनकी सुन नहीं रहे, तो बीजेपी के एक आम अदने से कार्यकर्ता की क्या बिसात होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। अब गुना के इस दंगल के बाद सभी की निगाहें भोपाल भाजपा प्रदेश कार्यालय पर टिकी हैं कि संगठन अपने इस बागी विधायक पर क्या एक्शन लेता है।









