Minister Pratap Karosia: मध्यप्रदेश बीजेपी में उस समय बवाल मच गया जब मोहन सरकार ने कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त को पद से हटा दिया। मध्यप्रदेश राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष प्रताप करोसिया के कार्यकाल को लेकर राजधानी से लेकर इंदौर तक सियासी बवाल मच गया है। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा उनकी सेवा समाप्ति का आदेश जारी किए जाने के बाद मामले ने कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले लिया है। जहां विभाग उनके कार्यकाल को पूर्ण बता रहा है, वहीं करोसिया ने इसे अपनी छवि धूमिल करने की साजिश करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, प्रताप करोसिया को 15 अप्रैल 2023 को राज्य सफाई कर्मचारी आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इस पद के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। करोसिया ने 19 अप्रैल 2023 को कार्यभार संभाला था। नियुक्ति आदेश में कार्यकाल की अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गई थी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 13 अप्रैल 2026 को आदेश जारी कर कहा कि करोसिया का कार्यकाल 14 अप्रैल को समाप्त हो गया है। आयोग की सचिव बबीता मरकाम के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र में उनकी सभी सरकारी सुविधाएं वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट से मिला स्टे
आदेश जारी होते ही प्रताप करोसिया ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को गलत बताते हुए आदेश पर हस्ताक्षर करने वाली सचिव के निलंबन के लिए पत्र लिखा है। उन्होंने इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद उन्हें स्टे मिल गया है। करोसिया का तर्क है कि उनकी नियुक्ति मंत्रालय से हुई थी, तो एक विभाग का अधिकारी उनकी सेवा समाप्ति का पत्र कैसे जारी कर सकता है? उन्होंने इसे शासन की गरिमा पर हमला और एक सोची-समझी साजिश बताया है।
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा
विभाग का कहना है कि तीन साल की अवधि रविवार को ही पूरी हो चुकी है, इसलिए वे अब पद पर नहीं हैं। दूसरी ओर, स्टे मिलने के बाद करोसिया अभी भी सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। इस खींचतान ने सरकार के अंदर की कलह को उजागर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट के दखल के बाद सरकार इस मामले में क्या नया रुख अपनाती है।









