भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना के तहत अस्पतालों की पात्रता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रदेश के 65 अस्पतालों को योजना के पैनल से बाहर कर दिया गया है। इसके बाद इन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के जरिए योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा प्रभावित होगी। सरकार की इस कार्रवाई के पीछे निर्धारित नियमों का पालन नहीं करना और मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने में कमी जैसे कारण बताए गए हैं। यह फैसला दीनदयाल स्वास्थ्य सुरक्षा परिषद की राज्य इम्पैनलमेंट कमेटी की 8 अक्टूबर को आयोजित बैठक में लिया गया। कार्रवाई के बाद आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को अस्पताल में भर्ती होने से पहले उसकी वर्तमान पात्रता की जानकारी लेने की जरूरत होगी।
NABH मान्यता नहीं मिलने पर 60 अस्पतालों पर कार्रवाई
अस्पतालों को योजना से बाहर करने का एक प्रमुख कारण राष्ट्रीय अस्पताल प्रत्यायन बोर्ड (NABH) से निर्धारित मान्यता संबंधी शर्तों को पूरा नहीं करना बताया गया है। जारी आदेश के मुताबिक, 60 अस्पताल तय समय सीमा में NABH एक्रिडिटेशन की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सके। इसके चलते उन्हें योजना के पैनल से हटाने का निर्णय लिया गया। इस सूची में इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर समेत प्रदेश के विभिन्न शहरों के अस्पताल शामिल बताए गए हैं। सरकार का उद्देश्य योजना के अंतर्गत उपचार उपलब्ध कराने वाले अस्पतालों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
छह महीने तक मरीजों का इलाज नहीं करने वाले अस्पताल भी बाहर
कार्रवाई का दूसरा कारण आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को उपचार उपलब्ध नहीं कराना है। जानकारी के अनुसार, पांच ऐसे अस्पतालों को भी पैनल से हटाया गया है, जिन्होंने पिछले छह महीनों के दौरान योजना के अंतर्गत किसी मरीज का उपचार नहीं किया।
इनमें शामिल हैं:
शाल्या जॉइंट केयर, भोपाल
मेट्रो न्यूरो हॉस्पिटल, ग्वालियर
रामनिवास आयरन हॉस्पिटल, नीमच
श्री डीपी केयर हॉस्पिटल, शाजापुर
न्यू सिटी हॉस्पिटल, टीकमगढ़
इन अस्पतालों को सूची से बाहर करने के बाद आयुष्मान योजना के तहत यहां उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी, जब तक संबंधित अस्पताल दोबारा योजना के लिए पात्र नहीं हो जाते।
इंदौर के 20 अस्पताल भी आयुष्मान पैनल से बाहर
इस कार्रवाई में इंदौर जिले के करीब 20 अस्पतालों के नाम सामने आए हैं। इनमें कई ऐसे चिकित्सा संस्थान शामिल हैं, जहां मरीज विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए पहुंचते हैं। बताई गई सूची में सेवाकुंज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, चोइथराम नेत्रालय, गीता भवन हॉस्पिटल, पाथ हॉस्पिटल, लक्ष्मी मेमोरियल हॉस्पिटल, दर्श हॉस्पिटल, मेक्रेटिना हॉस्पिटल, गुरुजी हॉस्पिटल, एसएमएस इमरजेंसी हॉस्पिटल और बांठिया हॉस्पिटल शामिल हैं। इसके अलावा एमएम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, वर्मा यूनियन हॉस्पिटल, खंडेलवाल हॉस्पिटल, मोहक हेटिज स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल, मेडिस्टा हॉस्पिटल, मेवाडा मेडिकेयर एंड आई केयर हॉस्पिटल, एथ्रोस क्लिनिक, चरक हॉस्पिटल, ओटू हॉस्पिटल और मेडिप्लस हॉस्पिटल के नाम भी सूची में बताए गए हैं।
ध्यान दें: इन अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत कैशलेस उपचार की सुविधा प्रभावित हो सकती है। हालांकि, अस्पताल में अन्य माध्यमों से इलाज उपलब्ध है या नहीं, यह संबंधित अस्पताल से पता करना होगा।
आयुष्मान कार्डधारक इलाज से पहले जरूर करें जांच
राज्य सरकार की इस कार्रवाई का उद्देश्य योजना के नियमों का पालन सुनिश्चित करना और लाभार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। योजना में शामिल अस्पतालों को पात्रता की शर्तें पूरी करना अनिवार्य है। जिन अस्पतालों को पैनल से बाहर किया गया है, उन्हें दोबारा शामिल होने के लिए निर्धारित मानकों और आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। आयुष्मान कार्डधारकों को सलाह है कि अस्पताल में भर्ती होने या इलाज कराने से पहले उसकी मौजूदा पैनल स्थिति की पुष्टि कर लें। इसके लिए आयुष्मान भारत की आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित हेल्पलाइन से जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इस कार्रवाई के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अस्पताल निर्धारित शर्तों को पूरा कर दोबारा योजना में शामिल होते हैं या नहीं।









