भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्य प्रदेश भाजपा की पहली कोर ग्रुप बैठक में सरकार और प्रशासन के बीच तालमेल का मुद्दा चर्चा के केंद्र में रहा। बैठक के दौरान अधिकारियों के कामकाज, मंत्रियों की अनदेखी और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नेताओं ने अपनी बात रखी। इसी बीच स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कथित कफ सिरप मामले का जिक्र होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से सवाल किए। बैठक में हुई इस चर्चा को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।
अधिकारियों के रवैये पर राजेंद्र शुक्ल ने जताई नाराजगी
नए प्रदेश प्रभारी बिप्लव कुमार देब और प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी की मौजूदगी में आयोजित बैठक में सरकार के कामकाज और प्रशासनिक समन्वय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई अफसर मंत्रियों के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने अधिकारियों के अपेक्षा के अनुरूप काम नहीं करने की बात भी रखी। राजेंद्र शुक्ल ने इस दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के घर में घुसने से जुड़ी घटना का उल्लेख करते हुए सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी चिंता जताई।
कफ सिरप मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग पर सवाल
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़े चर्चित कफ सिरप मामले का उल्लेख किया। सामने आई जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने राजेंद्र शुक्ल से सवाल किया कि स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी होने के बावजूद इस तरह की घटना कैसे हुई। इस चर्चा के बाद विभागीय जिम्मेदारी और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल उठने की बात कही जा रही है। हालांकि, बैठक में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच हुई बातचीत के विस्तृत विवरण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस घटनाक्रम से जुड़े दावों को पुष्ट जानकारी के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
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शिवराज सिंह चौहान ने उठाया प्रोटोकॉल का मुद्दा
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कलेक्टरों द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने का विषय उठाया। प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर सामने आए इन मुद्दों ने सरकार के कामकाज की व्यवस्था पर भी ध्यान खींचा।
कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री से संवाद का उठाया विषय
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी बैठक में मंत्रियों और मुख्यमंत्री के बीच नियमित संवाद का मुद्दा उठाया। सामने आई जानकारी के अनुसार, उन्होंने कहा कि कई बार 15-15 दिनों तक मुख्यमंत्री से बातचीत नहीं हो पाती। बैठक में उठे इन मुद्दों से सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल, मंत्रियों की प्रशासनिक भूमिका तथा अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा सामने आई है। भाजपा की इस कोर ग्रुप बैठक को प्रदेश में सरकार के कामकाज और प्रशासनिक समन्वय से जुड़े सवालों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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