भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश भाजपा में संगठन स्तर पर बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। दतिया विधानसभा उपचुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद संगठन की जमीनी स्थिति और स्थानीय नेतृत्व की सक्रियता को लेकर समीक्षा शुरू होने की चर्चा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी ने कई जिलों में बूथ स्तर तक संगठन की सक्रियता, कार्यकर्ताओं के समन्वय और चुनावी तैयारियों का आकलन किया है। इसी समीक्षा के आधार पर करीब 11 जिलों के जिलाध्यक्ष बदले जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, भाजपा की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
चर्चा में इन जिलों के नाम
संभावित संगठनात्मक फेरबदल को लेकर जिन जिलों के नाम राजनीतिक चर्चाओं में सामने आ रहे हैं, उनमें उमरिया, रायसेन, बालाघाट, टीकमगढ़, सिवनी, नर्मदापुरम और खरगोन सहित कुछ अन्य जिले भी शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों से जुड़े राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को अधिक सक्रिय और मजबूत बनाने की तैयारी में है। इसके तहत जिलों में संगठनात्मक ढांचे में बदलाव कर बूथ स्तर तक पार्टी के नेटवर्क को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।
सिफारिश के आधार पर नियुक्तियों की भी समीक्षा?
संगठन में संभावित बदलाव की चर्चा के बीच नियुक्तियों में सिफारिश और प्रभावशाली नेताओं की पसंद का मुद्दा भी सामने आ रहा है। पार्टी के भीतर कुछ स्थानों पर यह शिकायतें सामने आने की चर्चा है कि संगठन में जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ पदाधिकारी स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ अपेक्षित तालमेल और सक्रियता नहीं बना सके। ऐसे में भाजपा नेतृत्व अब ऐसे चेहरों को प्राथमिकता देने पर विचार कर सकता है, जिनकी क्षेत्र में मजबूत पकड़ हो, जो बूथ स्तर पर सक्रिय हों और कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर सकें।
नेताओं की पसंद से ज्यादा कार्यकर्ताओं की पकड़ पर फोकस
संभावित बदलाव के पीछे भाजपा की रणनीति संगठनात्मक जिम्मेदारियों को केवल बड़े नेताओं की सिफारिश के आधार पर तय करने के बजाय जमीनी सक्रियता और कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ को महत्व देने की हो सकती है। पार्टी नेतृत्व ऐसे पदाधिकारियों का आकलन कर सकता है, जिनकी अपने जिले में संगठनात्मक क्षमता और चुनावी प्रबंधन को लेकर बेहतर छवि रही है।
विधानसभा चुनाव में सक्रिय रहे चेहरों को मिल सकती है जिम्मेदारी
चर्चा है कि भाजपा विधानसभा चुनाव के दौरान सक्रिय भूमिका निभाने वाले कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को भी संगठन में आगे बढ़ा सकती है। जिन नेताओं ने अपने क्षेत्रों में बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ता समन्वय और चुनावी गतिविधियों में प्रभावी भूमिका निभाई थी, उन्हें जिलास्तर की जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे पार्टी आगामी चुनावों के लिए एक नई और ज्यादा सक्रिय संगठनात्मक टीम तैयार करने की रणनीति पर काम कर सकती है।
अभी आधिकारिक फैसला नहीं
फिलहाल 11 जिलाध्यक्षों को बदले जाने या उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर भाजपा की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए इन चर्चाओं को अभी संभावित संगठनात्मक फेरबदल के तौर पर ही देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में भाजपा नेतृत्व की बैठकों और संगठन से जुड़े निर्णयों के बाद ही साफ होगा कि किन जिलों में बदलाव किया जाता है और नए जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी किन नेताओं को सौंपी जाती है।
MP में अब 24 घंटे खुल सकेंगे मॉल-होटल और दुकानें… कर्मचारियों के लिए क्या बदला?









