मध्य प्रदेश सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के बजट को तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसी क्रम में वित्त विभाग ने सभी सरकारी विभागों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़ी योजनाओं के लिए बजट में निर्धारित हिस्सेदारी रखने के निर्देश दिए हैं. विभागों से कहा गया है कि अनुसूचित जनजाति के लिए 23 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के लिए 16 प्रतिशत के हिसाब से प्रावधान किया जाए. इस तरह दोनों वर्गों के लिए कुल 39 प्रतिशत बजट का प्रावधान करने को कहा गया है.
योजनाओं में राशि के इस्तेमाल की देनी होगी जानकारी
वित्त विभाग ने विभागों को यह भी स्पष्ट करने के लिए कहा है कि SC-ST उपयोजना के तहत मिलने वाली राशि को किन योजनाओं और किन क्षेत्रों में खर्च करने का प्रस्ताव है. बजट में इस जानकारी का उल्लेख स्पष्ट रूप से करना होगा.
सरकार का उद्देश्य उपयोजना के बजट को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना और राशि के इस्तेमाल की जानकारी को स्पष्ट रखना है. इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि निर्धारित राशि का उपयोग वास्तव में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित योजनाओं पर किस तरह किया जा रहा है.
उपयोजना के बजट पर उठते रहे हैं सवाल
अनुसूचित जाति और जनजाति उपयोजना की राशि के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. आरोप लगाए जाते रहे हैं कि इस मद के तहत रखे गए बजट का उपयोग कई बार ऐसे कामों में भी किया जाता है, जिनका सीधा संबंध इन वर्गों के कल्याण से नहीं होता.
इसी तरह की आपत्तियों को देखते हुए वित्त विभाग ने इस बार बजट तैयार करते समय राशि के प्रावधान और उसके संभावित उपयोग का स्पष्ट विवरण देने पर जोर दिया है.
2026-27 में निर्धारित हिस्से से ज्यादा बजट
प्रदेश के वर्ष 2026-27 के बजट में SC-ST उपयोजना के लिए तय अनुपात से अधिक राशि का प्रावधान किया गया था. अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए 47,429 करोड़ रुपये रखे गए, जो राज्य के कुल बजट का करीब 25.8 प्रतिशत है.
इसी तरह अनुसूचित जाति के लिए 31,192 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. यह कुल बजट का लगभग 17 प्रतिशत बैठता है. यानी दोनों वर्गों के लिए तय न्यूनतम अनुपात की तुलना में बजट में अधिक हिस्सेदारी रखी गई.
कांग्रेस पहले भी उठा चुकी है मुद्दा
उपयोजना की राशि के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठाती रही है. पार्टी की ओर से आरोप लगाया जाता रहा है कि निर्धारित मद की राशि का उपयोग तय उद्देश्य के अनुरूप नहीं किया जाता. यह मामला विधानसभा में भी उठ चुका है.
वित्त विभाग की मौजूदा तैयारियों के अनुसार आगामी बजट में विभागों को उपयोजना के तहत प्रस्तावित राशि और उसके इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज करनी होगी. इससे बजट प्रावधानों और खर्च के उद्देश्य को लेकर अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है.









