Mohan Cabinet Expansion: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार के ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने पर बीते रविवार का दिन मंत्रियों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं रहा। अगले चुनावों की तैयारी और संगठन में कसावट लाने के उद्देश्य से शुरू हुआ वन-टू-वन इंटरव्यू का दौर दोपहर 1 बजे से रात तक, यानी पूरे 8 घंटे तक चला। इस दौरान सीएम हाउस का माहौल किसी नौकरी के इंटरव्यू सेंटर जैसा नजर आया, जहां सूबे के कद्दावर मंत्री अपनी बारी के इंतजार में नर्वस दिखाई दिए।
दिग्गजों ने लिया साक्षात्कार
बंद कमरे में आयोजित इस अग्निपरीक्षा में सवाल पूछने के लिए भाजपा और सरकार के रणनीतिकारों का एक हाई-प्रोफाइल पैनल बैठा था। इस पैनल में खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल शामिल थे। पहले दिन कैबिनेट के 20 मंत्रियों को परखा गया।
एसी कमरे में भी छूटे पसीने
सूत्रों और चश्मदीदों के हवाले से बेहद रोचक जानकारियां सामने आई हैं। इंटरव्यू रूम से बाहर निकलते ही कई मंत्रियों के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था। AC कमरों में बैठने के आदी मंत्रियों के माथे पर पसीना साफ देखा जा सकता था। घबराहट का आलम यह था कि कुछ मंत्री बार-बार पानी पीते और होंठ सुखाते नजर आए, तो वहीं कुछ नेता नर्वस होने के कारण बार-बार वॉशरूम के चक्कर काटते दिखे। बाहर वेटिंग एरिया में बैठे मंत्री एक-दूसरे से बच्चों की तरह पूछ रहे थे कि अंदर क्या-क्या पूछ रहे हैं?
डिप्टी सीएम से हुई शुरूआत
इस महा-मंथन की शुरुआत उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के इंटरव्यू से हुई। वहीं, प्रदेश के दूसरे उपमुख्यमंत्री लू के कारण अस्वस्थ होने की वजह से इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके। सूत्रों की माने तो वन-टू-वन बातचीत शुरू होने से ठीक पहले सभी मंत्रियों से एक फॉर्म भरवाया गया था। इसके बाद पैनल ने उसी फॉर्म के आधार पर और संगठन की गुप्त रिपोर्ट को मिलाकर 12 से अधिक सवाल दागे। आप अपने प्रभार वाले जिलों में कितनी बार गए और वहां कितनी रातें गुजारीं प्रभार के जिलों में आपने वहां के सांसदों, विधायकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ कितनी बार बैठकें कीं और उनके साथ कितनी बार बैठकर भोजन किया? आपने अपने विभाग में ऐसा क्या नया किया है, जिससे प्रशासनिक कसावट आई हो और समाज में उसका सकारात्मक असर दिखा हो? ऐसे सवाल दागे गए।
नतीजों पर टिकीं नजरें
सूत्रों का कहना है कि पहले दिन के इंटरव्यू में अधिकांश मंत्रियों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक और कमजोर पाया गया है। कई मंत्री तो अपने ही प्रभार वाले जिलों और विभागीय आंकड़ों को लेकर पूछे गए सीधे सवालों का जवाब तक नहीं दे पाए। फिलहाल इस गोपनीय परीक्षा के नतीजे पूरी तरह गुप्त रखे गए हैं। बचे हुए 10 मंत्रियों का इंटरव्यू अगले चरण में होना है। साफ है कि इस प्रोग्रेस रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि मोहन कैबिनेट में किसकी कुर्सी सुरक्षित रहेगी और किसकी छुट्टी होगी। रिपोर्ट के सामने आते ही राज्य में बड़े फेरबदल और मंत्रिमंडल विस्तार का रास्ता साफ हो जाएगा।









