भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ निवेश पर भारी मुनाफे का सपना दिखाकर आम लोगों की जीवनभर की कमाई हड़पने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ मध्यप्रदेश पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा ऐसे मामलों की गहन जांच कर रही है। जांच के दायरे में कई पुरानी फाइलें भी शामिल हैं, जिनमें सहारा समूह से जुड़े मामले प्रमुख हैं। लंबे समय से बंद पड़ी शिकायतों को दोबारा खोलकर उनकी समीक्षा की जा रही है।
सहारा से जुड़े मामलों की फिर होगी पड़ताल
सीआईडी अब सहारा समूह में निवेश करने वाले लाखों लोगों की शिकायतों से जुड़ी पुरानी फाइलें दोबारा मंगवा रही है। इन मामलों की नए सिरे से जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि निवेशकों को राहत दिलाने के लिए आगे क्या कार्रवाई की जा सकती है।सूत्रों के अनुसार, सीआईडी की अलग-अलग टीमें करीब 11 मामलों की जांच में जुटी हैं। जांच के दौरान कई कंपनियों का नेटवर्क मध्यप्रदेश से बाहर तक फैला हुआ मिला है। इन कंपनियों के संचालन के तार महाराष्ट्र, मुंबई, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से जुड़े पाए गए हैं। आरोप है कि इन राज्यों से संचालित गिरोहों ने मध्यप्रदेश में एजेंट नियुक्त कर लोगों को निवेश के नाम पर ठगा।
इन कंपनियों पर भी जांच की आंच
परिवार डेयरी कंपनी ने डेयरी और कृषि परियोजनाओं में निवेश पर आकर्षक लाभ का वादा कर बड़ी संख्या में लोगों से रकम जुटाई, लेकिन बाद में कंपनी पर धोखाधड़ी के आरोप लगे। सन इंडिया कंपनी ने भी अधिक रिटर्न का प्रलोभन देकर निवेश कराया, लेकिन बाद में कंपनी का संचालन बंद हो गया और निवेशकों का पैसा फंस गया। केएमजे कंपनी ने निवेश राशि दोगुनी करने का दावा कर लोगों से करोड़ों रुपये एकत्र किए, लेकिन भुगतान का समय आने पर कंपनी के संचालक फरार हो गए। सक्षम कंपनी ने डेयरी और रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश के नाम पर बड़ी रकम जुटाई। बाद में गबन और वित्तीय अनियमितताओं के चलते निवेशकों की पूंजी डूब गई।
सहारा में हजारों करोड़ रुपये फंसे
मध्यप्रदेश में सहारा समूह के खिलाफ 123 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। अनुमान है कि प्रदेश के करीब 9 लाख निवेशकों का लगभग 6,689 करोड़ रुपये सहारा समूह में फंसा हुआ है। अब तक कुल राशि का केवल लगभग 5 प्रतिशत ही निवेशकों को वापस मिल पाया है। सहारा समूह के अधिकारियों और प्रबंधन पर करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप हैं। इन मामलों की जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) भी कर रहा है। इसके अलावा प्रदेश में सहारा की कई संपत्तियों को कथित तौर पर कम कीमत पर बेचने के मामलों की भी जांच चल रही है।
रिफंड प्रक्रिया बनी चुनौती
निवेशकों को धनवापसी के लिए सहारा-सेबी रिफंड पोर्टल पर आवेदन करना पड़ता है, लेकिन तकनीकी खामियों, दस्तावेजों के सत्यापन में देरी और सर्वर संबंधी समस्याओं के कारण रिफंड प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। भोपाल, सागर, जबलपुर, कटनी और ग्वालियर सहित कई शहरों में सहारा समूह की मूल्यवान जमीनों को कथित रूप से कम कीमत पर बेचने और बिक्री से प्राप्त पूरी राशि सेबी के रिफंड खाते में जमा नहीं करने के आरोप सामने आए हैं। इन मामलों की जांच ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही है।
मध्यप्रदेश में सहारा से जुड़े प्रमुख आंकड़े
फंसी हुई राशि: लगभग 6,689 करोड़ रुपये
प्रभावित निवेशक: करीब 9 लाख
दर्ज प्रकरण: 123 से अधिक एफआईआर
अब तक लौटाई गई राशि: लगभग 5 प्रतिशत









