मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर लगातार सामने आ रहे विवादों के बीच पार्टी अब अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करने जा रही है. जिला स्तर पर होने वाली नियुक्तियों में अब किसी एक नेता की पसंद को अंतिम आधार नहीं बनाया जाएगा. संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों से चर्चा के बाद ही नामों पर अंतिम मुहर लगाने की तैयारी है.
पिछले कुछ समय में कांग्रेस के संगठनात्मक फैसलों को लेकर कई जगह विरोध के स्वर उठे हैं. कुछ मामलों में कार्यकर्ताओं ने खुलकर नाराजगी जताई, जबकि कुछ नियुक्तियों का विवाद इतना बढ़ गया कि पार्टी को अपने निर्णय पर दोबारा विचार करना पड़ा. कहीं नियुक्तियां वापस ली गईं तो कहीं असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को संगठन में दूसरी जिम्मेदारी देकर मामला संभालने की कोशिश हुई. इसका असर पार्टी की गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल पर भी पड़ा.
विवादों से पार्टी ने लिया सबक
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार संगठन में अधिकतम सहमति बनाने की दिशा में काम करने की कोशिश कर रहे हैं. संगठन सृजन अभियान के दौरान केंद्रीय पर्यवेक्षकों की सिफारिश के आधार पर कई जिलों में अध्यक्षों की नियुक्तियां की गई थीं. हालांकि, कुछ जगहों पर इन फैसलों के खिलाफ असंतोष सामने आया और विरोध की आवाज प्रदेश कांग्रेस कार्यालय तक पहुंची.
इसके बाद पार्टी ने जिला कार्यकारिणियों के गठन में वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श की प्रक्रिया अपनाई. माना जा रहा है कि इस तरीके से विवादों में कमी आई. अब कांग्रेस इसी मॉडल को आगे होने वाली दूसरी संगठनात्मक नियुक्तियों में भी लागू करने की तैयारी कर रही है.
19 विभाग और 34 प्रकोष्ठों में नियुक्तियां बाकी
कांग्रेस के सामने आने वाले दिनों में संगठन का बड़ा विस्तार करने की जिम्मेदारी है. पार्टी के 19 विभागों और 34 प्रकोष्ठों में प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक पदाधिकारियों की नियुक्तियां होनी हैं. इसके अलावा चुनावी गतिविधियां भी धीरे-धीरे तेज होने वाली हैं. ऐसे में पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर अंदरूनी मतभेद बढ़ें.
पहले समन्वय समिति में चर्चा, फिर नाम तय
नई व्यवस्था के तहत जिला स्तर पर किसी पद के लिए नाम प्रस्तावित करने से पहले संबंधित समन्वय समिति में चर्चा की जाएगी. इन समितियों में विधायक, पूर्व विधायक, सांसद, पूर्व सांसद, पंचायत प्रतिनिधि, महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और संगठन के वरिष्ठ नेता शामिल हैं.
जिलाध्यक्ष अब सीधे नाम भेजने के बजाय समिति के सामने संभावित नाम रखेंगे. चर्चा के बाद सूची तैयार होगी और उसे प्रदेश कांग्रेस कार्यालय भेजा जाएगा.
सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी मिलेगा अवसर
पार्टी का उद्देश्य केवल विवादों को रोकना नहीं है. कांग्रेस चाहती है कि संगठन में मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को भी उचित प्रतिनिधित्व मिले. यदि प्रदेश नेतृत्व को लगता है कि किसी योग्य कार्यकर्ता का नाम सूची में शामिल नहीं किया गया है, तो संबंधित संगठन से उस पर दोबारा विचार करने को कहा जा सकता है.
प्रदेश कांग्रेस संगठन महासचिव संजय कामले के अनुसार संगठनात्मक व्यवस्था को अधिक विकेंद्रीकृत किया जा रहा है. नई प्रदेश कार्यकारिणी में भी क्षेत्रीय, राजनीतिक और सामाजिक संतुलन के साथ युवाओं तथा अनुभवी नेताओं को जगह देने की तैयारी है.
कुल मिलाकर कांग्रेस अब संगठन में नियुक्तियों के लिए एकतरफा फैसलों की जगह सामूहिक सहमति का रास्ता अपनाने जा रही है. आने वाले महीनों में होने वाली नियुक्तियां इस नई रणनीति की अहम परीक्षा साबित होंगी.







