MP Congress: मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट पर बिना वोटिंग के ही सूपड़ा साफ होने के बाद कांग्रेस कमेटी AICC के गलियारों में मध्य प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व पूरे घटनाक्रम को प्रदेश संगठन की लापरवाही मान रहा है।
सूत्रों का दावा है कि आने वाले कुछ ही दिनों में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की छुट्टी की जा सकती है। इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को भी उनके पद से हटाया जा सकता है। नई दिल्ली में 10 जनपथ और एआईसीसी मुख्यालय से आ रही सूत्रों की खबर के अनुसार आलाकमान मध्यप्रदेश के नेताओं की कार्यशैली पर सवाल उठा रही हैं।
राष्ट्रीय कांग्रेस का रुख
आलाकमान का साफ कहना है कि देश के इतने बड़े राज्यसभा चुनाव में एक चूक के कारण फॉर्म रिजेक्ट हो जाना बेहद शर्मनाक है। जब पार्टी को पता था कि बीजेपी साम-दाम-दंड-भेद अपना रही है, तो बैकअप के तौर पर किसी स्थानीय नेता से डमी फॉर्म क्यों नहीं भरवाया गया?
दिल्ली तलब पटवारी और सिंघार!
सूत्रों के अनुसार, इस चूक की पूरी जवाबदेही तय करने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राहुल गांधी के निर्देश पर जीतू पटवारी और उमंग सिंघार को समीक्षा बैठक के लिए जल्द ही दिल्ली तलब किया जा सकता है। वहां दोनों नेताओं से लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
बदले जाएंगे अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष!
विधानसभा चुनाव 2023 के बाद जब जीतू पटवारी को कमान सौंपी गई थी, तब से लेकर लोकसभा चुनाव 2024 और अब 2026 के राज्यसभा चुनाव तक, पार्टी लगातार हर मोर्चों पर पिछड़ती रही है। विधायकों की नाराजगी और समन्वय की कमी ने आलाकमान को सख्त फैसला लेने पर मजबूर किया है। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष के पद के लिए दिल्ली में कुछ वरिष्ठ और निर्विवादित चेहरों के नामों पर विचार शुरू हो चुका है, जो गुटबाजी से हटकर संगठन को नए सिरे से खड़ा कर सकें। वहीं, नेता प्रतिपक्ष के रूप में भी किसी विधायी कार्यों के जानकार विधायक को मौका दिया जा सकता है।
जयवर्धन सिंह अगले अध्यक्ष!
भोपाल एयरपोर्ट पर जिस तरह से सुरेश राजे और आर.के. दोगने जैसे विधायकों का गुस्सा फूट पड़ा था, उसने दिल्ली तक यह संदेश पहुंचा दिया है कि यदि अभी कड़ा एक्शन नहीं लिया गया, तो बचे हुए 64 विधायकों में भगदड़ मच सकती है। राजनैतिक जानकारों का मानना है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भले ही बाहर से बीजेपी पर मर्यादाएं तोड़ने का आरोप लगा रहे हों, लेकिन अंदरखाने वे और दिग्विजय सिंह भी इस घटनाक्रम से खफा हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी अदालती मामले की अधूरी जानकारी के चलते पूरी की पूरी पार्टी चुनाव से बाहर हो गई हो। अब देखना बेहद अहम होगा कि दिल्ली दरबार में पटवारी और सिंघार की पेशी के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस की कमान किस नए संकटमोचक के हाथों में सौंपी जाती है। सूत्रों का कहना है कि जयवर्धन सिंह को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर आलाकमान विचार कर रहा है।









