भोपाल। मध्य प्रदेश में विकास परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर जारी विवाद के बीच संसद में पेश रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2023 के बीच मध्य प्रदेश ने 371.54 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र खो दिया, जो देश में सबसे अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में गैर-वानिकी कार्यों के लिए सबसे ज्यादा वन भूमि भी मध्य प्रदेश में डायवर्ट की गई है।
2 साल में सबसे ज्यादा घटा वन क्षेत्र
भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) 2023 के अनुसार, वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश का वन क्षेत्र 77,444.98 वर्ग किलोमीटर था, जो 2023 में घटकर 77,073.44 वर्ग किलोमीटर रह गया। यानी 2 सालों में राज्य के 371.54 वर्ग किलोमीटर जंगल कम हो गए। इस अवधि में वन क्षेत्र में सबसे अधिक गिरावट मध्य प्रदेश में दर्ज की गई।
विकास परियोजनाओं के लिए सबसे ज्यादा वन भूमि दी गई
रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026 के बीच देशभर में 1,05,594.32 हेक्टेयर वन भूमि गैर-वानिकी कार्यों के लिए डायवर्ट की गई।
इनमें से 24,969.87 हेक्टेयर वन भूमि अकेले मध्य प्रदेश की रही, जो कुल डायवर्ट की गई भूमि का करीब 23.65 प्रतिशत है। यानी देश में विकास परियोजनाओं के लिए दी गई हर चौथी हेक्टेयर वन भूमि मध्य प्रदेश से गई।
खनन, सड़क और बिजली परियोजनाओं में सबसे आगे
पिछले पांच साल में देशभर में सबसे अधिक वन भूमि खनन और उत्खनन परियोजनाओं के लिए स्वीकृत की गई। इसके अलावा सड़क निर्माण, जलविद्युत एवं सिंचाई परियोजनाओं और बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के लिए भी बड़ी मात्रा में वन भूमि का उपयोग बदला गया। इन प्रमुख श्रेणियों में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही।
कई राज्यों में बढ़ा वन क्षेत्र
जहां मध्य प्रदेश में वन क्षेत्र घटा, वहीं कई राज्यों ने अपने जंगलों का दायरा बढ़ाया है। रिपोर्ट के अनुसार बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मिजोरम, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में वन क्षेत्र में बढ़ोतरी दर्ज की गई। पूरे देश में कुल 156.41 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र बढ़ा, लेकिन मध्य प्रदेश में सबसे अधिक कमी दर्ज हुई।
प्रतिपूरक वनीकरण अनिवार्य, 2030 तक हरित लक्ष्य
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है कि विकास परियोजनाओं के लिए वन भूमि दिए जाने पर प्रतिपूरक वनीकरण अनिवार्य है। इसके लिए CAMPA फंड के माध्यम से नए जंगल विकसित किए जाते हैं। सरकार ने वर्ष 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर बंजर और अवक्रमित भूमि को फिर से हरित बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम और हरित भारत मिशन के तहत काम किया जा रहा है।
बाघों के कॉरिडोर पर भी बढ़ी चिंता
मध्य प्रदेश देश का 'टाइगर स्टेट' माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार वन क्षेत्र घटने और बड़ी परियोजनाओं के विस्तार से बांधवगढ़, कान्हा, पन्ना और सतपुड़ा जैसे क्षेत्रों के वन्यजीव कॉरिडोर प्रभावित हो सकते हैं। इससे मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
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