प्रदेश के जिला और सिविल अस्पतालों में आंखों के इलाज की व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी अत्याधुनिक तकनीकों और उपकरणों को सरकारी अस्पतालों तक पहुंचाने की तैयारी कर ली है, जो अब तक केवल बड़े निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध थे. इस पहल का सबसे अधिक लाभ आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा. अब मरीजों को आंखों की जटिल जांच, रेटिना परीक्षण या बड़े ऑपरेशन के लिए महंगे निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा. सरकारी अस्पतालों में ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से इलाज आसान और सस्ता हो सकेगा.
डायबिटीज मरीजों के लिए आएंगे एआई आधारित फंडस कैमरे
स्वास्थ्य विभाग विशेष रूप से मधुमेह से पीड़ित मरीजों की आंखों की सुरक्षा पर ध्यान दे रहा है. इसी उद्देश्य से प्रदेश के अस्पतालों के लिए 51 आधुनिक फंडस कैमरे खरीदे जा रहे हैं. डायबिटीज के कारण आंखों की रेटिना प्रभावित होने और दृष्टि कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में समय पर जांच बेहद जरूरी होती है. इन कैमरों की खास बात यह है कि ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक पर आधारित होंगे. मरीज की आंखों की तस्वीर लेकर उसे ऑनलाइन विशेषज्ञ डॉक्टरों तक भेजा जा सकेगा. राजधानी या बड़े चिकित्सा केंद्रों में बैठे विशेषज्ञ तस्वीरों का विश्लेषण कर तुरंत सलाह दे सकेंगे. इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा परामर्श का लाभ मिलेगा.
बिजली जाने पर भी जारी रहेगा ऑपरेशन
सरकारी अस्पतालों में मोतियाबिंद और अन्य जटिल नेत्र सर्जरी के लिए नई पीढ़ी की माइक्रोस्कोप मशीनें भी स्थापित की जा रही हैं. इन उपकरणों में उच्च गुणवत्ता वाले लेंस लगाए गए हैं, जिनकी मदद से डॉक्टर आंखों की बेहद बारीक संरचनाओं को स्पष्ट रूप से देख सकेंगे. इन मशीनों को फुट स्विच के माध्यम से संचालित किया जा सकेगा, जिससे सर्जरी के दौरान कार्य और अधिक सटीक हो जाएगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें एक घंटे तक का पावर बैकअप उपलब्ध रहेगा. इससे ऑपरेशन के दौरान बिजली बाधित होने पर भी सर्जरी बिना किसी रुकावट के जारी रखी जा सकेगी.
ग्रामीण मरीजों को मिलेगा विशेषज्ञों का लाभ
एमपी पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक मयंक अग्रवाल के अनुसार प्रदेश में नेत्र चिकित्सा सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक से सुसज्जित किया जा रहा है. एआई आधारित फंडस कैमरों की मदद से गांवों और छोटे शहरों के मरीज भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह आसानी से प्राप्त कर सकेंगे. इन सभी आधुनिक उपकरणों को जल्द ही विभिन्न सरकारी अस्पतालों में स्थापित किया जाएगा, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.









