मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य मंत्रियों को मिलने वाले स्वेच्छानुदान की सीमा में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है. अब मंत्री किसी एक मामले में पहले की तुलना में अधिक आर्थिक सहायता दे सकेंगे. सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिए गए हैं. सरकार का कहना है कि यह फैसला मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर लागू किया गया है.
राज्य मंत्रियों को मिलने वाले स्वेच्छानुदान की सीमा में बढ़ोतरी
जानकारी के मुताबिक 11 मई 2026 को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी. इसके बाद विभागीय स्तर पर प्रक्रिया पूरी करते हुए आदेश जारी किए गए. नई व्यवस्था 18 मई 2026 से प्रभावी मानी जाएगी. इस फैसले के बाद राज्य मंत्रियों को जरूरतमंदों की सहायता के लिए पहले से ज्यादा राशि स्वीकृत करने का अधिकार मिल गया है.
राज्य मंत्री इतना दे सकते थे स्वेच्छानुदान
पहले किसी एक मामले में एक वर्ष के दौरान राज्य मंत्री अधिकतम 16 हजार रुपये तक का स्वेच्छानुदान दे सकते थे. लेकिन अब इस सीमा को बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है. यानी जरूरतमंद व्यक्तियों को मिलने वाली सहायता राशि में सीधे 9 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है. सरकार का मानना है कि बढ़ती जरूरतों और महंगाई को देखते हुए यह फैसला जरूरी था.
स्वेच्छानुदान का कैसे होता था उपयोग
स्वेच्छानुदान का उपयोग आमतौर पर ऐसे मामलों में किया जाता है जहां किसी जरूरतमंद व्यक्ति को तत्काल आर्थिक मदद की आवश्यकता होती है. कई बार इलाज, शिक्षा, दुर्घटना या अन्य आपात परिस्थितियों में लोग मंत्रियों से आर्थिक सहायता की मांग करते हैं. ऐसे मामलों में यह राशि राहत पहुंचाने का काम करती है. नई सीमा लागू होने के बाद अब अधिक मदद उपलब्ध कराई जा सकेगी.
सरकार के फैसले से होगा फायदा
सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इससे जरूरतमंद लोगों को समय पर ज्यादा आर्थिक सहायता मिल पाएगी. वहीं विपक्ष इस फैसले को लेकर सरकार की मंशा और उपयोगिता पर सवाल भी उठा सकता है. फिलहाल सरकार ने इसे जनहित में लिया गया फैसला बताया है और संबंधित विभागों को नए नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.
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