मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार द्वारा एक बार फिर बाजार से नया कर्ज उठाने के फैसले ने सूबे की राजनीति में गर्माहट ला दी है. बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों का हवाला देते हुए राज्य सरकार इस बार करीब 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण लेने जा रही है. हालांकि, इस वित्तीय कदम के सामने आते ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार की वित्तीय नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए सीधा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्य पर लगातार कर्ज का भारी बोझ लादा जा रहा है, लेकिन इसका कोई सकारात्मक असर न तो राज्य के विकास में दिख रहा है और ना ही युवाओं को नए रोजगार मिल पा रहे हैं. पटवारी ने तंज कसते हुए सवाल किया कि आखिर कर्ज का यह मोटा पैसा कहां गायब हो रहा है?
तीन हिस्सों में जुटाया जाएगा 3000 करोड़ का फंड
वित्तीय बाजार से यह 3000 करोड़ रुपये की रकम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से जुटाई जाएगी. इसके लिए 1000-1000 करोड़ रुपये की तीन अलग-अलग किश्तें तय की गई हैं, जो भिन्न-भिन्न समय अवधि के लिए होंगी. सबसे कम ब्याज दर की पेशकश करने वाली वित्तीय संस्थाओं की बोलियों को मंजूरी देकर यह फंड हासिल किया जाएगा. गौरतलब है कि इससे ठीक पहले भी राज्य सरकार ने 3600 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था.
'करप्शन और कमीशन' का खेल: जीतू पटवारी
जीतू पटवारी ने सत्तापक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कर्ज लेकर विकास करने का यह दावा सिर्फ एक छलावा है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे सरकार का असली मकसद 'करप्शन और कमीशन' के मिशन को चलाना है. कांग्रेस का कहना है कि सरकार आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को गिरवी रखकर प्रशासनिक और राजनीतिक खर्चों को पूरा कर रही है.
बीजेपी ने आरोपों को खारिज कर बताया नियमानुकूल
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. सरकार का पक्ष है कि यह सारा कर्ज निर्धारित वित्तीय सीमाओं और नियमों के दायरे में रहकर ही लिया जा रहा है. बीजेपी के अनुसार, यह राशि राज्य में चल रही बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और पूंजीगत विकास कार्यों को गति देने के लिए बेहद जरूरी है.









