मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जजों की कमी को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सात वकीलों को एमपी हाई कोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश को अपनी हरी झंडी दे दी है. सोमवार, 26 अक्टूबर को हुई कॉलेजियम की अहम बैठक में इन सभी नामों पर मुहर लगाई गई.
अगर केंद्र सरकार और राष्ट्रपति से इन नियुक्तियों को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो हाई कोर्ट में कार्यरत जजों की संख्या 38 से बढ़कर 45 हो जाएगी. जजों की संख्या बढ़ने से अदालत की काम करने की क्षमता मजबूत होगी और लंबे समय से अटके पड़े मामलों के निपटारे में भी काफी तेजी आने की उम्मीद है.
किन सात वकीलों को मिली पदोन्नति?
कॉलेजियम द्वारा जिन सात अधिवक्ताओं के नामों की सिफारिश भेजी गई है, उनमें इंदौर से डॉ. विवेक शरण और भक्ति व्यास, ग्वालियर से राजेश कुमार शुक्ला, जबलपुर से कनक गहरवार (कनक लता सिंह), श्रेयस पंडित और अविनाश जरगर, तथा नई दिल्ली से मृणाल एलकर (मृणाल मजुमदार) के नाम शामिल हैं.
स्वीकृत पद और मौजूदा स्थिति
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में कुल 53 जजों के पद स्वीकृत हैं. फिलहाल यहां 38 जज ही सेवाएं दे रहे हैं. इन सात नए जजों के पदभार संभालते ही यह संख्या 45 तक पहुंच जाएगी. इसके बावजूद हाई कोर्ट में 8 जजों के पद खाली रहेंगे.
मामलों के निपटारे में मिलेगी राहत
अदालत में जजों का आंकड़ा बढ़ने से काम का बोझ थोड़ा हल्का होगा और मुकदमों की सुनवाई में तेजी आएगी. हालांकि, मुकदमों के निपटारे की रफ्तार इस बात पर भी निर्भर करेगी कि नए जजों को किस तरह से केस आवंटित किए जाते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था कितनी मुस्तैद रहती है.
फिलहाल कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है. औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही ये सावत वकील जज के रूप में अपनी शपथ लेंगे.









