भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्य प्रदेश में मोहन यादव मंत्रिमंडल के विस्तार और मंत्रियों के विभागों में संभावित फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होने के संकेत हैं। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया को लेकर जल्द ही तीसरे चरण की चर्चा शुरू हो सकती है। इस चरण में संभावित नामों, मौजूदा मंत्रियों की भूमिका और विभागों में बदलाव को लेकर मंथन होने की संभावना है।
तीन मंत्रियों पर लटकी तलवार
चर्चा है कि कैबिनेट में बड़े बदलाव के तहत तीन मौजूदा मंत्रियों को बाहर किया जा सकता है, जबकि पांच नए विधायकों को मंत्री पद की जिम्मेदारी मिलने का रास्ता खुल सकता है। इसके साथ ही दो वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। ये सारी कवायद दिल्ली दरबार के इशारे पर की जाएगी। जिसमें संगठन की राय को भी तवज्जो मिलने की पूरी संभावना है।
तीन मंत्रियों की छुट्टी!
राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। पार्टी और सरकार के स्तर पर संगठनात्मक, क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट में बदलाव किया जा सकता है। जानकारों के मुताबिक मंत्री विजय शाह, धर्मेंद्र लोधी, लखन पटेल, प्रतिमा बागरी को लेकर पार्टी को फिर से फैसला लेना है। इनके विवादित बयानों और क्रियाकलाप के चलते पार्टी को मुश्किल का सामना करना पड़ा था।
पांच नए चेहरों की एंट्री संभव!
मोहन मंत्रिमंडल के प्रस्तावित बदलाव को अंतिम रूप मिलता है तो तीन मौजूदा मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। उनकी जगह पांच नए चेहरों को शामिल कर सरकार क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश कर सकती है। इनमें प्रमुखता से पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, सिंधिया कोटे से बृजेंद्र सिंह यादव, शैलेंद्र कुमार जैन, प्रदीप लारिया, अर्चना चिटनीस, मालिनी गौड़ का नाम शामिल है। इनमें से पांच नामों को फाइनल करने की कवायद की बात कही जा रही है।
दो वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा
एमपी में केवल नए मंत्रियों की नियुक्ति ही नहीं, बल्कि कुछ बड़े विभागों में भी फेरबदल की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं। जिनमें मंत्री कैलाश विजवयर्गीय, प्रहलाद पटेल प्रमुख हैं। विभागों के इस संभावित पुनर्वितरण को सरकार के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दतिया उपचुनाव की हार भी इसमें प्रमुख फैक्टर है।
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क्या है तीसरे और चौथे चरण की प्रक्रिया?
मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे को लेकर चलने वाली आंतरिक चर्चाओं में अलग-अलग स्तरों पर मंथन किया जाता है। बताया जा रहा है कि अब मामला तीसरे चरण की चर्चा की ओर बढ़ सकता है, जहां संभावित बदलावों और नामों पर अधिक गंभीरता से विचार होगा। इसके बाद चौथे चरण की चर्चा को अंतिम चरण माना जाता है। इसी स्तर पर मंत्रिमंडल विस्तार, नए मंत्रियों के नाम और विभागों में बदलाव से जुड़े फैसलों को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना रहती है।
फैसले पर टिकीं भोपाल से दिल्ली तक नजरें
मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा लंबे समय से राजनीतिक गलियारों में चल रही है। वहीं अब इस पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना जताई जा रही है, चूंकि पार्टी को फजीहत से बचाने और आगामी नगरीय निकाय, पंचायत और विधानसभा चुनाव की चुनौतियों से निपटने के लिए मंत्रियों के कामकाज में बदलाव समेत अन्य चेहरों को शामिल करने का दबाव है। नतीजतन बदलाव की नई बयार मोहन मंत्रिमंडल में दिखाई दे सकती है।









